LIBROS DEL AUTOR: swami vivekanand

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  • Gyanyog in Gujarati (જ્ઞાનયોગ)
    Swami Vivekanand
    ’જ્ઞાનયોગ’ સ્વામી વિવેકાનંદની એક મહત્ત્વપૂર્ણ કૃતિ છે, જે જ્ઞાનના માર્ગ પર કેન્દ્રિત છે. આ પુસ્તકમાં, સ્વામીજીએ વેદાંત દર્શનના ગૂઢ સિદ્ધાંતોને સરળ અને સુગમ ભાષામાં પ્રસ્તુત કર્યા છે. તેઓ બતાવે છે કે, સાચું જ્ઞાન આત્માની પ્રકૃતિ અને બ્રહ્માંડની સાથે એના સંબંધને સમજવામાં નિહિત છે.સ્વામીજી તર્ક અને બુદ્ધિના માધ્યમથી આધ્યાત્મિક સત્યની શોધ પર ભાર આપે છે. તેઓ અંધવિશ્વાસો અને કર્મકાંડ...
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    18,68 €

  • Rajyog in Gujarati (રાજયોગ)
    Swami Vivekanand
    સ્વામી વિવેકાનંદ દ્વારા રચિત ’રાજયોગ’ પતંજલિના યોગ સૂત્રો પર આધારિત એક પ્રભાવશાળી કૃતિ છે. આ પુસ્તક મનની ગહનતાને સમજવા અને એને નિયંત્રિત કરવાની વૈજ્ઞાનિક રીતો પર પ્રકાશ ફેંકે છે. એમાં ધ્યાન, ધારણા, પ્રત્યાહાર, પ્રાણાયામ અને સમાધિ જેવાં યોગના વિભિન્ન પાસાઓનું વિસ્તૃત વર્ણન મળે છે. વિવેકાનંદે જટિલ દાર્શનિક વિચારોને સરળ ભાષામાં પ્રસ્તુત કર્યા છે, જેનાથી તે આધ્યાત્મિક સાધકો અને જિજ...
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    18,68 €

  • Karmyog in Gujarati (કર્મયોગ)
    Swami Vivekanand
    ’કર્મયોગ’ આપણને શીખવાડે છે કે, જીવનમાં કર્મ કરવા અપરિહાર્ય છે, પરંતુ મહત્ત્વપૂર્ણ એ છે કે આપણે કયા ભાવ અને સમજની સાથે કર્મ કરીએ છીએ. સ્વામી વિવેકાનંદ આ પુસ્તકમાં નિષ્કામ કર્મના સિદ્ધાંત પર ભાર આપે છે, અર્થાત્ ફળની ઇચ્છા કર્યા વગર કર્તવ્યનું પાલન કરવું. તેઓ બતાવે છે કે, સ્વાર્થરહિત કર્મ જ આપણને બંધનમાંથી મુક્ત કરી શકે છે અને આધ્યાત્મિક ઉન્નતિની તરફ લઈ જઈ શકે છે.આ પુસ્તક વિભિન્ન ...
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    13,41 €

  • Dhyanyog in Gujarati (ધ્યાનયોગ)
    Swami Vivekanand
    ’ધ્યાનયોગ’ સ્વામી વિવેકાનંદના વિભિન્ન વ્યાખ્યાનો અને લેખોમાંથી સંકલિત એક મહત્ત્વપૂર્ણ કૃતિ છે. આ પુસ્તક ધ્યાનની અવધારણા, એની જરૂરિયાદ અને અભ્યાસની સરળ તેમજ પ્રભાવી વિધિઓ પર પ્રકાશ ફેંકે છે. સ્વામીજી બતાવે છે કે, ધ્યાન માત્ર એક ધાર્મિક ક્રિયા નથી, બલ્કે મનને એકાગ્ર કરવા અને આંતરિક શક્તિને જાગૃત કરવાની એક વૈજ્ઞાનિક રીત છે.પુસ્તકમાં મનની ચંચળતાને નિયંત્રિત કરવા, એકાગ્રતા વધારવા અન...
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    11,87 €

  • Bhaktiyog in Gujarati (ભક્તિયોગ)
    Swami Vivekanand
    સ્વામી વિવેકાનંદ દ્વારા રચિત ’ભક્તિયોગ’ ભક્તિના માર્ગને સમર્પિત એક અત્યંત મહત્ત્વપૂર્ણ ગ્રંથ છે. આ પુસ્તક ભક્તિના મૂળભૂત સિદ્ધાંતો અને એના વિભિન્ન અભ્યાસોનું વિસ્તૃત વિવરણ પ્રસ્તુત કરે છે. એમાં ભક્તિને ઈશ્વર પ્રતિ અતૂટ પ્રેમ અને પૂર્ણ સમર્પણના રૂપમાં પરિભાષિત કરવામાં આવી છે. ’ભક્તિયોગ’ એ શક્તિશાળી ભાવનાને ઉજાગર કરે છે, જે એક સાધકને સીધો પરમાત્મા સાથે જોડે છે. આ આપણને શીખવાડે છે...
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    10,59 €

  • Premyog in Gujarati (પ્રેમયોગ)
    Swami Vivekanand
    સ્વામી વિવેકાનંદની પ્રેમયોગ’ પુસ્તક ભક્તિ અને પ્રેમના આધ્યાત્મિક પથ પર એક ઉજ્જવળ પ્રકાશ ફેંકે છે. આ ગ્રંથમાં સ્વામીજી પ્રેમ અને ભક્તિના ઊંડા અંતરસંબંધોને ખૂબ જ સ્પષ્ટતાથી વ્યક્ત કરે છે. આ પુસ્તક એ સત્યને ઉજાગર કરે છે કે, ઈશ્વર પ્રતિ સાચો પ્રેમ જ ભક્તિનો સાર છે. આ પ્રેમ સાંસારિક બંધનો અને ઈચ્છાઓથી પરે એક નિર્મળ અને નિઃસ્વાર્થ ભાવના છે. ’પ્રેમયોગ’ જીવનમાં પ્રેમના અદ્વિતીય મહત્ત્વ...
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    12,13 €

  • ब्रह्मचर्य
    Swami Vivekanand
    क्या आप अपने जीवन में आत्म-नियंत्रण, शांति और अंदर की ताकत चाहते हैं?इस पुस्तक में स्वामी विवेकानंद बताते हैं कि ब्रह्मचर्य सिर्फ त्याग नहीं है, बल्कि यह आत्म-शक्ति, मानसिक स्पष्टता और ऊर्जावान जीवन का रास्ता है।यह पुस्तक आसान भाषा में समझाती है कि ब्रह्मचर्य कैसे सोच, आदत और चरित्र को बेहतर बनाता है। विद्यार्थी, साधक और हर वो व्यक्ति जो खुद को मजबूत बनाना चाहता है-उनके लिए यह ...
    Disponible

    36,13 €

  • ब्रह्मचर्य
    Swami Vivekanand
    क्या आप अपने जीवन में आत्म-नियंत्रण, शांति और अंदर की ताकत चाहते हैं?इस पुस्तक में स्वामी विवेकानंद बताते हैं कि ब्रह्मचर्य सिर्फ त्याग नहीं है, बल्कि यह आत्म-शक्ति, मानसिक स्पष्टता और ऊर्जावान जीवन का रास्ता है।यह पुस्तक आसान भाषा में समझाती है कि ब्रह्मचर्य कैसे सोच, आदत और चरित्र को बेहतर बनाता है। विद्यार्थी, साधक और हर वो व्यक्ति जो खुद को मजबूत बनाना चाहता है-उनके लिए यह ...
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    21,34 €

  • Premyog (प्रेमयोग)
    Swami Vivekanand
    स्वामी विवेकानंद की ’प्रेमयोग’ पुस्तक भक्ति और प्रेम के आध्यात्मिक पथ पर एक उज्ज्वल प्रकाश डालती है। इस ग्रन्थ में स्वामीजी प्रेम और भक्ति के गहरे अंतरसंबंधों को बड़ी स्पष्टता से व्यक्त करते हैं। यह पुस्तक इस सत्य को उजागर करती है कि ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम ही भक्ति का सार है। यह प्रेम सांसारिक बंधनों और इच्छाओं से परे एक निर्मल और निःस्वार्थ भावना है। ’प्रेमयोग’ जीवन में प्...
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    12,22 €

  • Man ki shaktiyan
    Swami vivekanand
    मानव मन असाधारण शक्तियों का भंडार है, जो असीमित संभावनाओं से भरा हुआ है। स्वामी विवेकानंद ने हमें बताया है कि अधिकांश लोग इस अद्भुत क्षमता से अनभिज्ञ रहते हैं। उनकी शिक्षाएँ इसे उजागर करने का प्रयास करती हैं। स्वामी विवेकानंद ने मन की गहराइयों में छिपी शक्तियों को पहचानने, उन्हें विकसित करने और सही दिशा में उपयोग करने पर जोर दिया। उनका मानना था कि आत्म-निरीक्षण, ध्यान और सकारात...
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    10,60 €

  • Dhyan ewam uski vidhiyan
    Swami Vivekanand
    स्वामी विवेकानन्द की यह पुस्तक ध्यान और आत्म-खोज के मार्ग पर एक प्रकाशस्तंभ है। ध्यान की परिवर्तनकारी शक्ति को पहचानकर स्वामी विवेकानंद ने इसे आत्म-साक्षात्कार और आध्यात्मिक जागृति का मुख्य साधन माना। इस पुस्तक में वे ध्यान के अभ्यास की चुनौतियों और गलत धारणाओं को दूर करने के लिए गहरी अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। स्वामी विवेकानंद एक नियमित ध्यान अभ्यास की महत्ता, विकर्षणों को न...
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    14,40 €

  • Dhyan Ewam Uski Vidhiyan Tatha Man Ki Shaktiyan
    Swami Vivekanand
    मेरा आदर्श अवश्य ही बहुत कम शब्दों में कहा जा सकता है और वह है-मनुष्य-जाति को उसके दिव्य स्वरूप का उपदेश देना तथा जीवन के हर क्षेन में उसे अभिव्यक्त करने का उपाय बताना। यह संसार अंधविश्वासों की जंजीरों से जकड़ा हुआ है। जो अत्याचार से दबे हुए है, चाहे वे पुरुष हों या स्ली, मैं उन पर दया करता है, किंतु अत्याचारियों के लिए भी मेरे अंद्र करुणा है। एक बात जो मैं सूर्य के प्रकाश के स...
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    16,55 €

  • Meditation And Its Methods
    Swami Vivekanand
    In Meditation and Its Methods, Swami Vivekananda distills the ancient wisdom of India into practical teachings for modern seekers. This timeless work explores the profound practice of meditation, offering clear and insightful guidance on how to master the mind, awaken inner potential, and attain spiritual enlightenment.Drawing from the deep well of Vedantic philosophy, Vivekana...
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    13,33 €

  • Bhaktiyog by Swami Vivekanand
    Swami Vivekanand
    भक्तियोग स्वामी विवेकानंद द्वारा रचित एक महान ग्रंथ है, जो भक्ति के माध्यम से ईश्वर प्राप्ति के मार्ग को सरल और सुगम बनाता है। यह पुस्तक भक्ति के सच्चे अर्थ, उसके प्रकार, और उसकी गहराई को समझाती है। स्वामी विवेकानंद का मानना था कि भक्ति केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह आत्मा की ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम है।भक्तियोग में उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि भक्ति ...
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    14,28 €

  • Karamyog by Swami Vivekanand
    Swami Vivekanand
    कर्मयोग स्वामी विवेकानंद द्वारा रचित एक प्रेरणादायक पुस्तक है, जो कर्म और आध्यात्मिकता के गहन संबंध को स्पष्ट करती है। यह ग्रंथ कर्म के महत्व, उसके सही स्वरूप और उसे योग के रूप में अपनाने की विधि को सरल और प्रभावी तरीके से समझाता है। स्वामी विवेकानंद का मानना है कि कर्म न केवल जीवन का अनिवार्य हिस्सा है, बल्कि यह ईश्वर तक पहुंचने का एक साधन भी है।कर्मयोग में विवेकानंद ने यह बता...
    Disponible

    15,71 €

  • Gyanyog by Swami Vivekanand
    Swami Vivekanand
    ज्ञानयोग स्वामी विवेकानंद द्वारा रचित एक अद्वितीय ग्रंथ है, जो ज्ञान और विवेक के माध्यम से आत्मा और परमात्मा की अनुभूति कराने का मार्ग दिखाता है। यह पुस्तक वेदांत दर्शन के आधार पर ज्ञान को आध्यात्मिकता का सर्वोच्च साधन मानती है। स्वामी विवेकानंद ने इसमें यह बताया है कि सत्य की खोज और अज्ञान का नाश ही जीवन का परम उद्देश्य है।ज्ञानयोग में उन्होंने आत्मा, माया, ब्रह्मांड, और ईश्वर...
    Disponible

    21,02 €

  • Bhaktiyog
    Swami Vivekanand
    भक्तियोग (Bhaktiyog)भक्तियोग भगवान के प्रति पूर्ण भक्ति और समर्पण पर आधारित है। यह ग्रंथ ईश्वर के प्रति प्रेम और उनके प्रति समर्पण की भावना को गहराई से समझाने का प्रयास करता है।मुख्य विषय: भक्ति, आराधना और ईश्वर के प्रति विश्वास।विशेषताएं:सगुण और निर्गुण भक्ति के मार्ग।भक्ति के माध्यम से आत्मा की शुद्धि।ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और आराधना के महत्व को रेखांकित किया गया है। ...
    Disponible

    14,28 €

  • Gyanyog
    Swami Vivekanand
     ज्ञानयोग (Gyanyog)ज्ञानयोग वेदांत दर्शन पर आधारित है और सत्य की खोज में विवेक और तर्क के महत्व को रेखांकित करता है। यह आत्मा, ब्रह्म, और माया के बारे में गहन विश्लेषण करता है।मुख्य विषय: तर्क, विचार और आत्म-साक्षात्कार।विशेषताएं:आत्मा और ब्रह्म के एकत्व की अवधारणा।विवेक और वैराग्य को जीवन का अंग बनाने की प्रेरणा।अद्वैत वेदांत के सिद्धांतों का व्यावहारिक उपयोग। ...
    Disponible

    21,02 €

  • Karamyog
    Swami Vivekanand
    कर्मयोग (Karamyog)कर्मयोग में स्वामी विवेकानंद ने निस्वार्थ कर्म को जीवन का मुख्य आधार बताया है। इस ग्रंथ में कर्म के महत्व और उसके परिणामों पर गहन चर्चा की गई है।मुख्य विषय: निस्वार्थ कर्म और धर्म।विशेषताएं:फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्यों का पालन करने की शिक्षा।कर्म के माध्यम से आध्यात्मिक विकास का मार्ग।सेवा को ईश्वर की पूजा का सर्वोच्च रूप माना गया। ...
    Disponible

    15,71 €

  • Premyog
    Swami Vivekanand
    प्रेमयोग (Premyog)प्रेमयोग में प्रेम और करुणा को आध्यात्मिक विकास का आधार बताया गया है। इसमें सिखाया गया है कि प्रेम के माध्यम से कैसे मनुष्य स्वयं और दूसरों के प्रति दयालु बन सकता है।मुख्य विषय: प्रेम, करुणा और आत्मसमर्पण।विशेषताएं:प्रेम को ईश्वर तक पहुंचने का सर्वोत्तम मार्ग बताया गया।प्रेम के माध्यम से जीवन में आनंद और शांति प्राप्त करने की विधि।दूसरों के प्रति दयालु और करुण...
    Disponible

    14,44 €

  • Rajyog
    Swami Vivekanand
    राजयोग (Rajyog)राजयोग स्वामी विवेकानंद की एक प्रसिद्ध कृति है, जो पतंजलि के योगसूत्रों पर आधारित है। इसमें ध्यान और आत्म-संयम के माध्यम से आत्मा की शुद्धि और आत्म-साक्षात्कार का मार्ग बताया गया है।मुख्य विषय: मानसिक एकाग्रता, ध्यान, और समाधि।विशेषताएं:मन को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न ध्यान तकनीकों का वर्णन।समाधि की अवस्थाओं और उनके महत्व को समझाया गया है।आत्मा और ब्रह्मांड क...
    Disponible

    18,86 €

  • Raja yoga
    Swami Vivekanand
    राजयोग आठ अंगों में विभक्त है। पहला है यम-अर्थात् अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी का अभाव), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह। दूसरा है नियम-अर्थात् शौच सन्तोष, तपस्या, स्वाध्याय (अध्यात्म-शास्त्रपाठ) और ईश्वरप्रणिधान अर्थात् ईश्वर को आत्मसमर्पण। तीसरा है आसन-अर्थात् बैठने की प्रणाली । चौथा है प्राणायाम-अर्थात् प्राण का संयम । पाँचवा है प्रत्याहार-अर्थात् मन की विषयाभिमुखी गति को फेरकर उसे अन्...
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    14,36 €

  • Gyan Yoga
    Swami Vivekanand
    इस पंचेन्द्रियग्राह्य जगत् में मनुष्य इतना अधिक आसक्त है कि वह उसे सहज में ही छोड़ना नहीं चाहता। किन्तु वह इस बाह्य जगत् को चाहे जितना ही सत्य या साररूप क्यों न समझे, प्रत्येक व्यक्ति और जाति के जीवन में एक समय ऐसा अवश्य आता है कि जब उसे इच्छा न रहते हुए भी प्रश्न करना पड़ता है- ’क्या यह जगत् सत्य है?’ जिन व्यक्तियों को अपनी इन्द्रियों की विश्वसनीयता में शंका करने का तनिक भी सम...
    Disponible

    15,42 €

  • How NOT to Think About Money- [DELUXE HARDCOVER EDITION]
    Swami Vivekanand
    'भक्ति योग' स्वामी विवेकानंद द्वारा रचित एक आध्यात्मिक ग्रंथ है, जिसमें उन्होंने भक्ति यानी ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण को मोक्ष का एक सरल और प्रभावशाली मार्ग बताया है। इस पुस्तक में स्वामी जी ने बताया है कि सच्ची भक्ति आत्म-समर्पण, श्रद्धा, और ईश्वर में अटूट विश्वास से उत्पन्न होती है।उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भक्ति किसी अंधविश्वास या अंधानुकरण का नाम नहीं, बल्कि यह एक उच्...
    Disponible

    14,28 €

  • Raja Yoga
    Swami Vivekanand
    'राज योग' स्वामी विवेकानंद द्वारा रचित एक अत्यंत प्रभावशाली ग्रंथ है, जिसमें उन्होंने राजयोग यानी ध्यान और मानसिक अनुशासन के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार का मार्ग बताया है। यह ग्रंथ मुख्य रूप से पतंजलि के योगसूत्रों पर आधारित है, जिसे स्वामी जी ने सरल और व्यावहारिक भाषा में व्याख्यायित किया है।राजयोग का उद्देश्य है - मन को नियंत्रित करके आत्मा का अनुभव करना। इसमें ध्यान (ध्यान यो...
    Disponible

    20,01 €

  • Premyog
    Swami Vivekanand
    सब कुछ देखो, सब कुछ करो, सब कुछ छुओ, पर किसी वस्तु में आसक्त मत होओ। ज्योंही वह आसक्ति आयी कि समझो मनुष्य अपने आपको खो बैठा; फिर वह अपना स्वामी नहीं रह जाता, उसी क्षण दास या गुलाम बन जाता है। यदि किसी स्त्री की दृढ़ आसक्ति किसी पुरुष पर हुई, तो वह स्त्री उस पुरुष की गुलाम बन जाती है या वह पुरुष उस स्त्री का गुलाम बन जाता है। पर गुलाम बनने में कोई लाभ नहीं है। ...
    Disponible

    10,67 €

  • Karmyog
    Swami Vivekanand
    सब कुछ देखो, सब कुछ करो, सब कुछ छुओ, पर किसी वस्तु में आसक्त मत होओ। ज्योंही वह आसक्ति आयी कि समझो मनुष्य अपने आपको खो बैठा; फिर वह अपना स्वामी नहीं रह जाता, उसी क्षण दास या गुलाम बन जाता है। यदि किसी स्त्री की दृढ़ आसक्ति किसी पुरुष पर हुई, तो वह स्त्री उस पुरुष की गुलाम बन जाती है या वह पुरुष उस स्त्री का गुलाम बन जाता है। पर गुलाम बनने में कोई लाभ नहीं है। ...
    Disponible

    10,80 €

  • Karmyog
    Swami Vivekanand
    The real name of Swami Vivekananda was Narendranath Datta. He was born on 12 January, 1863 in Kolkata in a noble and religious Bengali family. He completed his studies from the presidency college. He was not only a great saint but also a patriot, an orator, a theoretician as well as a great writer. On 4 July, 1902 he passed away while doing meditation. Swamiji was highly devote...
    Disponible

    14,56 €

  • Bhaktiyog
    Swami Vivekanand
    The real name of Swami Vivekananda was Narendranath Datta. He was born on 12 January, 1863 in Kolkata in a noble and religious Bengali family. He completed his studies from the Presidency College. He was not only a great saint but also a patriot, an orator, a theoretician as well as a great writer. On 4 July, 1902 he passed away while doing meditation. Swamiji was highly devote...
    Disponible

    14,42 €

  • Gyanyog
    Swami Vivekanand
    The real name of Swami Vivekananda was Narendranath Datta. He was born on 12 January, 1863 in Kolkata in a noble and religious Bengali family. He completed his studies from the Presidency College. He was not only a great saint but also a patriot, an orator, a theoretician as well as a great writer. On 4 July, 1902 he passed away while doing meditation. Swamiji was highly devote...
    Disponible

    21,89 €


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