Librería Samer Atenea
Librería Aciertas (Toledo)
Kálamo Books
Librería Perelló (Valencia)
Librería Elías (Asturias)
Donde los libros
Librería Kolima (Madrid)
Librería Proteo (Málaga)
ज्ञानयोग स्वामी विवेकानंद द्वारा रचित एक अद्वितीय ग्रंथ है, जो ज्ञान और विवेक के माध्यम से आत्मा और परमात्मा की अनुभूति कराने का मार्ग दिखाता है। यह पुस्तक वेदांत दर्शन के आधार पर ज्ञान को आध्यात्मिकता का सर्वोच्च साधन मानती है। स्वामी विवेकानंद ने इसमें यह बताया है कि सत्य की खोज और अज्ञान का नाश ही जीवन का परम उद्देश्य है।ज्ञानयोग में उन्होंने आत्मा, माया, ब्रह्मांड, और ईश्वर के वास्तविक स्वरूप को समझाने का प्रयास किया है। स्वामी विवेकानंद का कहना है कि अज्ञान (अविद्या) के कारण मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को भूल जाता है और सांसारिक बंधनों में फंसा रहता है। ज्ञानयोग के माध्यम से आत्मा की पहचान और उसकी ब्रह्मांड के साथ एकता को अनुभव किया जा सकता है।यह ग्रंथ यह भी सिखाता है कि स्वाध्याय, चिंतन, और ध्यान के द्वारा विवेक जागृत कर आत्मा के परम ज्ञान को प्राप्त किया जा सकता है। ज्ञानयोग हर उस साधक के लिए मार्गदर्शक है जो तर्क और विचार के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने और ईश्वर का साक्षात्कार करने की आकांक्षा रखता है। स्वामी विवेकानंद के विचार इस ग्रंथ को एक कालजयी प्रेरणा स्रोत बनाते हैं।