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प्रतापगढ़, उत्तरप्रदेश के ग्राम भुड़हा में 11 मार्च 1934 को जन्म। मां-बाप से नाम मिला शिव प्रताप सिंह। 1958 से स्वतंत्र चिंतन, मनन एवं सम्यक् विचार प्रारंभ। 1966 अक्टूबर में ओशो की तीन प्रमुख पुस्तिकाएं हाथ लगीं। 1966 दिसम्बर में एक रहस्यमय अनुभूति जिससे एक सर्वथा नये जीवन की शुरुआत।स्वामी अगेह भारती 10 फरवरी 1967 को ओशो से ’योगेश भवन’ जबलपुर में प्रथम भेंट। 29 जनवरी 1971 को ओशो के हाथों संन्यस्त, अनेक यात्राओं में ओशो के साथ। 1985 में रजनीशपुरम अमरीका में चार माह ओशो के अतिथि।ओशो से मिलने के पूर्व धर्मयुग, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, ज्ञानोदय, दिनमान, आजकल, जनयुग, मधुमती, समिधा आदि राष्ट्र स्तर की पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। जबलपुर से प्रकाशित ’कृति परिचय’ मासिक के सहयोगी सम्पादक, ओशो के विचारों को समर्पित जबलपुर से प्रकाशित युक्रांद पाक्षिक के विशेषांकों का सम्पादन। ’रजनीश यानी प्रेम’ (1972), ’इन्द्रधनुषी स्मृतियों में भगवान श्री रजनीश’ (1978), ’ओशो-गाथा’ (1993), ’ओशो के संग’ (1994),’ ओशो की मधुशाला में बच्चन’ (1994), प्रकाशित । (1) ओशो-लीला (2) मेरी रजनीशपुरम यात्रा (3) एक ओशो-शिष्य की अंतर्यात्रा (4) अंतहीन प्रारंभ(कविताएं) (5) कुछ कविताएं : कुछ गजलें (6) आदमी की कहानी (7) ओशो-रस भीगयों (कविताएं) (8) रिटर्निंग होम (इंगलिश पोयम्स) (9) ओशो एक-स्वाद अनेक प्रकाशनाधीन । ओशो कार्यों में पूर्णतः लग जाने के उद्देश्य से अक्टूबर 1991 में भारतीय रेलवे से सेवा निवृत्ति। 13 जनवरी 1993 से 30 जून 1994 तक ओशो कम्यून, पूना में रहा। अब कहीं भी प्रवचन, प्रेस वार्ता, बुद्धिजीवियों के मध्य विचार गोष्ठी एवं ध्यान-साधना-शिविर संचालन हेतु उपलब्ध ।