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बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में लिखा वंदे मातरम। एक ऐसा गीत जो गुलाम हिंदुस्तान में आजादी के दीवानों का मंत्र बन गया। उनके इस ऋण से मानव समाज कभी भी उऋण नहीं हो सकता। मातृभूमि की इससे अच्छी वंदना कोई और हो भी नहीं सकती। गीत वंदे मातरम उनके उपन्यास ’आनंदमठ’ में समाहित है। पहले उन्होंने पहले दो पद लिखे थे और उसके उपरांत उपन्यास आनंदमठ लिखते समय शेष पद लिखे।संविधान सभा ने वंदे मातरम गीत के पहले दो पद राष्ट्रगीत के लिए स्वीकृत किए। यह दोनों पद मां की वंदना हैं। 150 वर्षों की यात्रा में सभी जाने-माने गायकों ने अपना स्वर दिया और संगीतकारों ने संगीतबद्ध किया। ए आर रहमान ने वंदे मातरम गीत को ’मां तुझे सलाम’ के तर्ज पर एक नया आयाम दिया।