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तेनालीराम कोई विदूषक नहीं, महान राजा कृष्णदेव राय के दरबार का सबसे विलक्षण और बुद्धिमान दरबारी था। ऐसा परिहासप्रिय, दूरदर्शी और हाजिरजवाब दरबारी जिसकी अनोखी सूझबूझ, चतुराई और हास्य से भरे कटाक्ष के आगे विरोधी पानी माँगते थे । तेनालीराम को नीचा दिखाने के वे जितने भी षड्यंत्र रचते, दरबार में तेनालीराम का कद उतना ही बड़ा होता जाता था ।तेनालीराम की चकित कर देनेवाली असाधारण सूझबूझ, भोली बातों में छिपी गजब की चतुराई, हास्यप्रियता और अनोखे कारनामों की पहली बार हिंदी में ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर प्रामाणिक और बेहद रोचक प्रस्तुति । इन अनोखे किस्सों को पढ़कर आप तेनालीराम की प्रखर बुद्धि और मेधा के कायल हो जाएँगे ।