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’देश पुकार रहा है’ में देशप्रेम से छलछलाती गौरव गाथाएँ हैं। इनमें पहली बलिदान कथा है, ’भारत माता की पुकार पर’। देशप्रेम की भावना से छलछलाती इस मर्मस्पर्शी गाथा में अपना सब कुछ छोड़कर देश की आजादी के लिए लड़ने वाले हीरेन दा हैं, जो गाँधी जी के सच्चे शिष्य हैं और सन् बयालीस के ’भारत छोड़ो आंदोलन’ में घर-घर अलख जगाने निकल पड़े हैं। और एक जोशीली बालिका वनमाला भी, जिसके रोएँ-रोएँ में अपने देश के लिए कुछ करने की तड़प है।मुझे विश्वास है कि ’देश पुकार रहा है’ मैं देश के लिए तन-मन-धन कुरबान करने वाले सच्चे वीर और साहसी भारतीयों की ये गौरव गाथाएँ पाठकों के मन को बाँध लेंगी, और उनके अंदर भी देश के लिए कुछ करने की भावना पैदा होगी। वे इस पुस्तक को खुद तो पढ़ेंगे ही, अपने दोस्तों को भी जरूर पढ़वाना चाहेंगे।