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स्क्रीनप्ले मास्टर सुकुमारसिनेमा केवल कहानी कहना नहीं, बल्कि कहानी को प्रभावशाली पटकथा और दृश्य-अनुभव में बदलने की कला है। ’स्क्रीनप्ले मास्टर सुकुमार’ इसी कला को सुकुमार की फिल्मों और उनके विशिष्ट पटकथा-प्रयोगों के माध्यम से समझने का एक गंभीर प्रयास है।यह पुस्तक कहानी, कथन, चरित्र-निर्माण, संघर्ष, भावनात्मक संरचना और पटकथा-विन्यास जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का विश्लेषण करती है। अमूर्त कथन-सिद्धांतों को सुकुमार की फिल्मों के उदाहरणों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है, जिससे सिनेमा की रचनात्मक प्रक्रिया को समझना सहज बनता है।'प्रयोगशरणा वैयाकरणाः' की भावना के अनुरूप, सुकुमार के रचनात्मक प्रयोगों को आधार बनाकर उनमें दिखाई देने वाले कथन-सूत्रों की पहचान करने का प्रयास किया गया है।यह पुस्तक केवल सुकुमार के सिनेमा का अध्ययन नहीं, बल्कि तेलुगु पटकथा और कथन-शास्त्र को समझने की दिशा में एक शोध-यात्रा है-सिनेमा के विद्यार्थियों, लेखकों, पटकथा-लेखकों, निर्देशकों और सिनेमा-प्रेमियों के लिए।