Sankhya Darshan (सांख्य दर्शन)

Sankhya Darshan (सांख्य दर्शन)

Dr. Vinay

28,01 €
IVA incluido
Disponible
Editorial:
Repro India Limited
Año de edición:
2024
ISBN:
9789359642185
28,01 €
IVA incluido
Disponible

Selecciona una librería:

  • Librería Desdémona
  • Librería Samer Atenea
  • Librería Aciertas (Toledo)
  • Kálamo Books
  • Librería Perelló (Valencia)
  • Librería Elías (Asturias)
  • Donde los libros
  • Librería Kolima (Madrid)
  • Librería Proteo (Málaga)

सभी मत वाले मानते हैं कि दर्शन की दृष्टि से सांख्‍य-दर्शन या जीवन की सांख्‍य-प्रणाली आदि प्रणालियों में मानी जाती है और भारतीय चिंतन-परंम्‍परा की बात करते हुए ’के. दामोदरन’ ने उसे मूल वैदिक प्रणाली नहीं माना और उनका यह भी कहना है कि महाभारत आदि में सांख्‍य की विचारधारा मिल जाती है। उनके विचार में सांख्‍य की विचारधारा मिल जाती है। उनके विचार में सांख्‍य विचार-पद्धति, जो प्राचीनतम दार्शनिक प्रणालियों में से एक है, भारत के वैचारिक जीवन को एक लंबे समय तक काफी प्रभावित किए रही। कुछ विद्वानों के मतानुसार इस प्रणाली का नाम सांख्‍य-प्रणाली इसलिए पड़ा कि यह वैदिक अवधारणाओं से नहीं, वरन तर्कपूर्ण और युक्तियंक्‍त चिंतन के द्वारासत्‍य की प्राप्ति की समर्थक थी। सांख्‍य-प्रणाली, जैसा कि डैवीजी ने कहा है ’विश्‍व की उत्‍पत्ति, मनुष्‍य की प्रकृति और उनके पारस्‍परिक संबंधों तथा उनके भविष्‍य के बारे में प्रत्‍येक विचारवान मनुष्‍य के मस्तिष्‍क में उठने वाले रहस्‍यपूर्ण प्रश्‍नों के केवल युक्ति द्वारा उत्‍तर देने का अब तक उपलब्‍ध प्राचीनतम प्रयास है।

Artículos relacionados

Otros libros del autor

  • Bhavishya Puran (भविष्‍य पुराण)
    Dr. Vinay
    महर्षि वेदव्‍यास द्वारा रचित ’भविष्‍य पुराण’ को अठारह पुराणों में नवां स्‍थान प्राप्‍त है। इस पुराण में भगवान् सूर्यनारायण की महिमा, उनके स्‍वरूप, पूजा-उपासना विधि आदि का विस्‍तृत वर्णन होने के कारण इसे ’सौर पुराण’ या ’सौर ग्रंथ’ भी कहा गया है। इस पुराण में विभिन्‍न पुण्‍यमय व्रत-उपवासों, उनकी विधियों उनसे संबंद्ध पौराणिक तथा शिक्षाप्रद आख्‍यानों-उपाख्‍यानों का विस्‍तृत विवेचन ...
    Disponible

    14,35 €

  • Harivansh Puran (हरिवंश पुराण)
    Dr. Vinay
    भारतीय जीवन धारा में जिन ग्रंथों का महत्वपूर्ण स्थान है उनमें पुराण भक्ति ग्रंथों के रूप में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पुराण-साहित्य भारतीय जीवन और साहित्य की अक्षुण्ण निधि हैं। इनमें मानव जीवन के उत्कर्ष और अपकर्ष की अनेक गाथाएं मिलती हैं। कर्मकांड से ज्ञान की ओर आते हुए भारतीय मानस चिंतन के बाद भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित हुई। विकास की इसी प्रक्रिया में बहुदेववाद और निर...
    Disponible

    14,35 €

  • Skanda Purana (स्कंद पुराण)
    Dr. Vinay
    भारतीय जीवन-धारा में जिन ग्रंथों का महत्वपूर्ण स्थान है उनमें पुराण भक्ति ग्रंथों के रूप में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते है। पुराण-साहित्य भारतीय जीवन और साहित्य की अक्षुण्ण निधि हैं। इनमें मानव जीवन के उत्कर्ष और अपकर्ष की अनेक गाथाएं मिलती हैं। कर्मकांड से ज्ञान की ओर आते हुए भारतीय मानस चिंतन के बाद भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित हुई। विकास की इसी प्रक्रिया में बहुदेववाद और निर्...
    Disponible

    14,39 €

  • Markandey Puran
    Dr. Vinay
    भारतीय जीवन-धारा में जिन ग्रंथों का महत्वपूर्ण स्थान है उनमें पुराण भक्ति ग्रंथों के रूप में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पुराण-साहित्य भारतीय जीवन और साहित्य की अक्षुण्ण निधि हैं। इनमें मानव जीवन के उत्कर्ष और अपकर्ष की अनेक गाथाएं मिलती हैं। कर्मकांड से ज्ञान की ओर आते हुए भारतीय मानस चिंतन के बाद भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित हुई। विकास की इसी प्रक्रिया में बहुदेववाद और निर...
    Disponible

    14,39 €

  • Ramayan Ke Amar Paatra - Mahabali Ravan (रामायण के अमर पात्र - महाबली रावण)
    Dr. Vinay
    रावण रामायण का एक प्रमुख चरित्र है। रावण लंका का राजा था। वह अपने दस सिरों के कारण भी जाना जाता था, जिसके कारण उसका नाम दशानन (दश = दस + आनन = दस मुख वाला) भी था। किसी भी कृति के लिए नायक के साथ ही सशक्त खलनायक का होना अति आवश्यक है। रामकथा में रावण ऐसा पात्र है, जो राम के उज्ज्वल चरित्र को उभारने का काम करता है। किंचित मान्यतानुसार रावण में अनेक गुण भी थे। सारस्वत ब्राह्मण पुल...
    Disponible

    30,32 €

  • Shrimad Bhagwat Purana (श्रीमद् भागवत् पुराण)
    Dr. Vinay
    भारतीय जीवन-धारा में जिन ग्रंथों का महत्वपूर्ण स्थान है उनमें पुराण भक्ति ग्रंथों के रूप में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। पुराण-साहित्य भारतीय जीवन और साहित्य की अक्षुण्ण निधि हैं। इनमें मानव जीवन के उत्कर्ष और अपकर्ष की अनेक गाथाएं मिलती हैं। कर्मकांड से ज्ञान की ओर आते हुए भारतीय मानस चिंतन के बाद भक्ति की अविरल धारा प्रवाहित हुई। विकास की इसी प्रक्रिया में बहुदेववाद और नि...
    Disponible

    17,78 €