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’रंगभूमि’ का नायक सूरदास जनहित के लिए होम होने की विचित्र क्षमता रखता है। ’रंगभूमि’ के कथानक में अनेक रंग-बिरंगे धागे लिपटे हुए हैं। उपन्यास का केन्द्र बिन्दु है-दैन्य और दारिद्र्य में ग्राम समाज का जीवन और साथ ही, एक ग्राम सेवक का ईसाई परिवार है, जो गांव के चारगाह पर सिगरेट का कारखाना लगाने के लिए अधीर है। अनेक धनी व्यक्ति हैं, जिनके बीच अगणित अन्तर्विरोध हैं- लोभ, ख्याति की लालसा और महत्त्वाकांक्षाएं। महाराजा हैं, उनके उत्पीड़न के लिए रजवाड़े हैं। उपन्यास का घटना चक्र प्रबल वेग में घूमता है। कथा में वेग और नाटकीयता दोनों ही हैं।