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निर्मला’ प्रेमचंद का एक मार्मिक उपन्यास है, जो भारतीय समाज में दहेज प्रथा, स्त्री की असुरक्षा, और विवाह संबंधी समस्याओं को उजागर करता है। इस उपन्यास की नायिका निर्मला है, जो एक सुंदर और समझदार युवती है। उसका विवाह एक वृद्ध पुरुष, मुंशी तुलसीराम से हो जाता है, जो पहले से ही तीन बच्चों का पिता है।निर्मला और तुलसीराम के बीच उम्र के इस बड़े अंतर के कारण उनके वैवाहिक जीवन में कई कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं। तुलसीराम का संदेह और निर्मला की भावनात्मक पीड़ा उपन्यास के केंद्रीय विषय हैं। निर्मला का जीवन उसके पतिव्रत धर्म और समाज के बंधनों के बीच बंधा हुआ है, जिससे वह अंततः टूट जाती है।प्रेमचंद ने ’निर्मला’ के माध्यम से समाज की विडंबनाओं और स्त्री जीवन की कठिनाइयों को गहराई से चित्रित किया है, जिससे यह उपन्यास आज भी समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश रखता है।