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कथा सम्राट प्रेमचंद द्वारा इस्लाम धर्म के संस्थापक हज़रत मुहम्मद के नवासे हुसैन की शहादत का सजीव एवं रोमांचक विवरण लिए हुए एक ऐतिहासिक नाटक है-कर्बला। इस मार्मिक नाटक में यह दिखाया गया है कि उस काल के मुस्लिम शासकों ने किस प्रकार मानवता प्रेमी व असहायों व निर्बलों की सहायता करने वाले हुसैन को परेशान किया और अमानवीय यातनाएँ देकर उसका कत्ल कर दिया। कर्बला के मैदान में लड़ा गया यह युद्ध अपना विशेष महत्त्व रखता है। यह एक दुखांत नाटक है।जब भी मुहर्रम की बात होती है, तो सबसे पहले जिक्र कर्बला का किया जाता है। आज से लगभग १४०० साल पहले तारीख-ए-इस्लाम में कर्बला की जंग हुई थी। ये जंग जुल्म के ख़िलाफ़, इंसाफ़ के लिए लड़ी गई थी। शिया मुसलमानों के लिए, मक्का के बाद कर्बला सबसे पवित्र स्थल है। इन्हीं बातों को मद्देनज़र रखते हुए प्रेमचंद ने ’कर्बला’ नाटक की रचना की।