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अमलेश राजू की पत्रकारिता 1992-93 में पढाई के दौरान शरू हई। हिंदस्तान नवभारत टाइम्स, आज, प्रभात खबर, राष्ट्रीय सहारा, कुबेर टाईम्स, दैनिक भास्कर, आउटलुक, प्रथम प्रवक्ता और प्रेस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की पत्रिका ’ग्रासरूट’ व ’विदुर’ में नियमित लेखन के साथ, 2009 में सीबीआई एकेडमी से पत्रकारिता में प्रशिक्षित हैं।दिल्ली नगर निगम के राजभाषा अनुभाग से हिन्दी पत्रकारिता में उत्कृष्ट कार्य के लिए 2016-17 में सम्मान के साथ 2007 में मातृश्री, 2009 में परमश्री, 2013 में आईएचआरपीसी का ह्यूमन राइट्स अवार्ड्स और 2016 में रीयल संवाद एक्सीलेंस अवार्ड् से सम्मानित किये गये हैं।राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से 40 दिवसीय कार्यशाला में प्रशिक्षित अमलेश दिल्ली विश्वविद्यालय, गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, आईआईएमसी और जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन में पत्रकारिता के अतिथि शिक्षक के रूप में समय-समय पर अध्यापन के साथ उनकी ’आजादी के पचास साल भारत में राजनीतिक संकट’ नामक चर्चित आलेख प्रकाशित है।पत्रकारिता में स्नातकोत्तर के साथ सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक गतिविधियों में संस्कृति मंत्रालय की संस्था गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजघाट, पवित्र प्रयास ट्रस्ट, उदित आशा वेलफेयर सोसाइटी, बीइंग इंडियन और गांधी ज्ञान मंदिर, बिहार के साथ जुड़कर कार्यशाला और संगोष्ठी आयोजित करने का अनुभव । नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्टस (इंडिया) की 1972 में स्थापित दिल्ली इकाई दिल्ली पत्रकार संघ (डीजेए) के मौजूदा महासचिव । अमलेश राजू की 2010 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के सानिध्य में रहने वालों के संस्मरण पर आधारित ’जेपी जैसा मैंने देखा’ नामक चर्चित पुस्तक प्रकाशित हुई है। संप्रति- इंडियन एक्सप्रेस के हिंदी संस्करण ’जनसत्ता’ नई दिल्ली में वरिष्ठ संवाददाता क