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'आचार्य चाणक्य को कौटिल्य या विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है। वे तक्षशिला विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के आचार्य थे, उनकी राजनीतिक पकड़ गहरी थी। प्राचीनकाल में चाणक्य ने ही अपनी कूटनीति के प्रयोजन से सम्राट सिकंदर को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। इसमें संशय नहीं कि भारतीय इतिहास में संभवत: पहली बार कूटनीति का प्रयोग आचार्य चाणक्य द्वारा ही किया गया था। चन्द्रगुप्त को अखंड भारत का सम्राट बनाकर भारत में मौर्य वंश का आधिपत्य स्थापित करके अखंड भारत की नींव इनके द्वारा ही डाली गयी। यह वह समय था जब भारत को आर्यावर्त के नाम से जाना जाता था, जोकि कई छोटे-छोटे साम्राज्य में विभाजित थी। इन सभी साम्राज्यों को जोड़कर अखंड भारत बनाने का स्वप्न आचार्य चाणक्य ने देखा। अतः इसमें कोई दो राय नहीं कि सर्वप्रथम अखंड भारत की परिकल्पना आचार्य चाणक्य ने ही की थी। दरअसल आचार्य चाणक्य को राजनीति और कूटनीति में महारत हासिल थी। उन्होंने एक महत्त्वपूर्ण नीतिग्रंथ भी रचा, जिसका नाम ’चाणक्य नीति’ है। उन्होंने अपने इस नीति ग्रन्थ में जीवन में सफलता कैसे प्राप्त करें? जीवन का वास्तविक मूल्य क्या है? तथा मनुष्य के आचार-विचार के व्यावहारिक सिद्धांत क्या है? जीवन के इन्हीं उपयोगी मूल्यों तथा सफलता सूचक श्लोकों का वर्णन इस पुस्तक में किया गया है जाकि पठनीय है।'