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प्रस्तुत पुस्तक में बड़े आवासीय स्कूलों में छात्रों के जीवन शैली तथा सामान्य छात्रों व सरकारी स्कॉलरशिप से पढ़ने वाले छात्रों के बीच आपसी मतभेद को बताया गया है। सामान्य छात्रों उनके अभिभावकों, अध्यापकों यहां तक की प्रबंध तंत्र तक के यह विचार थे कि मेरिट स्कॉलर्स समाज के निचले तबके से आते हैं और वह स्कूल के माहौल को खराब करते हैं। वह परीक्षा में टॉप करते हैं, जिससे सामान्य छात्रों में हीन भावना होती है। इन कारणों से मेरिट स्कॉलर्स को छोटी-छोटी बातों में स्कूल से निष्काषित कर दिया जाता था। कभी-कभी तो उन्हें सुनियोजित तरीके से निष्काषित कर दिया जाता था। यह वो समय था जब इन्हीं ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से सामाजिक व आर्थिक परिवर्तन हो रहे थे, जाति वर्ग में परिवर्तित हो रही थी। लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे थे। इसी काल में ’जमीदारी उन्मूलन’, ’जमीन हदबंदी प्रिवीपर्स’ समाप्ति जैसे कानून बनाये गए, जिनकी सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका रही।