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विन्ध्याचल के घने वन और शाश्वत पर्वतों के बीच बसा है विन्ध्यागढ़, एक छोटा सा राज्यमान जहाँ भक्ति, प्रेम और साहस की गूँज हर दिशा में सुनाई देती है।यहीं जन्मी थी राजकुमारी काश्वी, जिनका हृदय माँ दुर्गा की भक्ति और मानवता के प्रति अपार करुणा से भरा था। उसकी आँखों में चमक थी, पर जीवन की राहें उससे कहती थीं कि प्रेम और स्वतंत्रता पाने के लिए उसे कठिनाइयों से जूझना होगा।एक दिन उसके जीवन में प्रवेश करता है माधव, एक अनाथ युवक, जिसकी सरलता, पराक्रम और निष्कलंक प्रेम उसकी आत्मा को छू जाता है। लेकिन समाज और नियमों की बंदिशें उन्हें अलग कर देती हैं।कहानी उनकी संगर्ष, त्याग और भक्ति की यात्रा है। महल की बंदिशों से लेकर विन्ध्याचल के शक्तिपीठ की शरण तक, जहाँ राजकुमारी अपने हृदय की पीड़ा, विश्वास और आशा के साथ माँ विंध्यवासिनी से संवाद करती है।यह उपन्यास हमें ले जाता है उस रोमांचक, आध्यात्मिक और भावनात्मक यात्रा पर, जहाँ प्रेम और भक्ति मिलकर जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं, और हर पृष्ठ पर पाठक को यह एहसास होता है कि यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि एक जीवन गाथा है वो स्वयं माँ भवानी द्वारा लिखी गई है।