LIBROS DEL AUTOR: ayush kumar singh

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  • कलियुगी आँगन
    Ayush Kumar Singh
    एक ही घर में पले दो बेटे एक सफल, दूसरा खामोश। दिल्ली के बदरपुर में बसे एक परिवार का आँगन, जहाँ सफलता की गलतियाँ माफ़ हैं, लेकिन भक्ति अपराध बन जाती है। छोटा बेटा अभिषेक शर्मा पूजा में शांति खोजता है, पर तुलना, तानों और उपेक्षा के बीच धीरे-धीरे टूटने लगता है। जब घर ही सहारा नहीं बनता, तो गलत लोग उसका फ़ायदा उठाते हैं और वह अंधेरे की ओर बढ़ जाता है। लेकिन माँ भवानी की कृपा और एक ...
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    8,44 €

  • चन्द्रभूषण
    Ayush Kumar Singh
    यह उपन्यास एक साधारण गाँव के असाधारण संघर्षों की कहानी है, जिसका केन्द्र है परिवार का सबसे छोटा बेटा चन्द्रभूषण। घर में बँटवारे, लालच, परम्पराओं का दबाव, और रिश्तों की टूटन के बीच वही अकेला बच्चा है जो सच, सम्मान और प्रेम को थामे बड़ा होता है। बचपन में माँ को खोने के बाद वह पिता के संघर्ष, भाइयों के झगड़े, और समाज के कठोर रीति-रिवाजों को अपनी आँखों से देखता है। पढ़ाई और मेहनत स...
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    9,95 €

  • नियति का लेख
    Ayush Kumar Singh
    यह उपन्यास विराज और वसुंधरा की उन भावनाओं की कथा है, जिन्हें जीवन ने कई मोड़ देकर परखा, कभी दूरी से, कभी संघर्ष से, और कभी नियति की कठोर लिखावट से।एक ओर विराज, जिसका बचपन बिछड़न और अकेलेपन में बीता। दूसरी ओर वसुंधरा, निर्मल हृदय वाली वह युवती, जिसका जीवन एक दिन अचानक बदल गया।संयोग से शुरू हुई उनकी मुलाकात, परिस्थितियों से बिछड़ गई,पर प्रेम और भक्ति के सहारे उनकी यात्रा आगे बढ़त...
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    9,71 €

  • विन्ध्यगाथा
    Ayush Kumar Singh
    विन्ध्याचल के घने वन और शाश्वत पर्वतों के बीच बसा है विन्ध्यागढ़, एक छोटा सा राज्यमान जहाँ भक्ति, प्रेम और साहस की गूँज हर दिशा में सुनाई देती है।यहीं जन्मी थी राजकुमारी काश्वी, जिनका हृदय माँ दुर्गा की भक्ति और मानवता के प्रति अपार करुणा से भरा था। उसकी आँखों में चमक थी, पर जीवन की राहें उससे कहती थीं कि प्रेम और स्वतंत्रता पाने के लिए उसे कठिनाइयों से जूझना होगा।एक दिन उसके ज...
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    9,95 €

  • धागों की दुनिया
    Ayush Kumar Singh
    'हर जीवन एक धागा है। जो कभी जुड़ता है, कभी बिखरता है।'यह उपन्यास आर्या नामक एक ग्रामीण लड़की की यात्रा है, जो अपनी माँ की बीमारी, समाज के अन्याय और आत्मिक प्रश्नों से जूझते हुए जीवन की सच्चाई तलाशती है।वह जानकी, रेवा, विद्याधर, लालू, और विवेक जैसे पात्रों से मिलती है। जो जीवन के अलग-अलग धागों को उसके सामने खोलते हैं।'धागों की दुनिया' केवल एक कहानी नहीं, बल्कि आत्मा की खोज, करुण...
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    9,89 €

  • तिरछे आईने
    Ayush Kumar Singh
    यह केवल एक प्रेम कथा नहीं है। यह उन आवाज़ों की कहानी है जिन्हें अक्सर दबा दिया जाता है। यह उन रिश्तों की व्यथा है जिन्हें समाज तिरछा मानकर नकार देता है। ’तिरछे आईने’ एक ऐसे किशोर की यात्रा है जो अपने भीतर उठते सवालों से लड़ रहा है। जो खुद को समझना चाहता है, जो अपने जैसे किसी को ढूंढता है, और जो यह जानना चाहता है कि क्या उसका प्रेम भी उतना ही पवित्र है जितना किसी और का।यह उपन्या...
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    9,76 €

  • दुर्गा का मंदिर
    Ayush Kumar Singh
    देवदासी प्रथा भारत की पुरानी और जटिल सामाजिक कुरीतियों में से एक है। पहले ये प्रथा मंदिरों से जुड़ी हुई एक पवित्र सेवा मानी जाती थी, जिसमें लड़कियां देवी-देवताओं की सेवा करती थीं और अपनी पूरी जिंदगी उनकी भक्ति में बिताती थीं। देवदासी लड़कियों को समाज में एक खास सम्मान भी मिलता था क्योंकि उन्हें देवी की प्रतिमा के साथ जोड़ा जाता था।लेकिन समय के साथ-साथ ये प्रथा विकृत होकर कई जगह...
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    9,94 €

  • अखंड रण
    Ayush Kumar Singh
    इतिहास केवल विजेताओं की गाथाओं तक सीमित नहीं होता; कुछ कथाएँ रक्त से लिखी जाती हैं-पीड़ा, साहस और बलिदान की अमर धधकती ज्वालाओं से। 'अखंड रण' ऐसी ही एक गाथा है, जहाँ नारी केवल सहनशीलता की मूर्ति नहीं, अपितु सृजन और संहार दोनों की अधिष्ठात्री है।समाज ने बाल विवाह, दहेज प्रथा, और स्त्री-शोषण को युगों से दुषित घोषित किया, परंतु इनकी वास्तविक पृष्ठभूमि को समझने का प्रयास कम ही किया।...
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    9,85 €

  • संविधान के सिपाही
    Ayush Kumar Singh
    यह एक गाँव से शुरू होने वाली कहानी है, जहाँ दो छात्र संविधान में दिए गए अधिकारों को पढ़ते तो हैं, लेकिन उनका सामना असल ज़िंदगी में होने वाले भेदभाव, जातिवाद और अन्याय से होता है। वे देखते हैं कि समानता और स्वतंत्रता की बातें सिर्फ किताबों तक सीमित हैं।शहर की ओर पढ़ाई और नौकरी की खोज में निकलने पर वे पाते हैं कि जाति के आधार पर राजनीति, शिक्षा, और सरकारी नौकरियों में भी गहरी खाई...
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    9,79 €

  • मैं ज़िंदा हूँ
    Ayush Kumar Singh
    मैं जिंदा हूं एक स्त्री की प्रेरणादायक कहानी है जो संघर्षों के बाद भी हार नहीं मानती। हना खान एक तलाकशुदा मां है, जो समाज की बंदिशों और पितृसत्ता के विरुद्ध खड़ी होती है। शिक्षा के बल पर वह बीए ऑनर्स संस्कृत में टॉपर बनती है और फिर यूपीएससी पास कर आईपीएस अधिकारी बनती है। यह कहानी महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता, शिक्षा और जीवन में दूसरे मौके के महत्व को दर्शाती है। हना का जीवन यह...
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    8,44 €