LIBROS DEL AUTOR: dr bhimrao ambedkar

6 resultados para LIBROS DEL AUTOR: dr bhimrao ambedkar

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  • Buddha Athwa Karl Marx बुद्ध अथवा कार्लमार्क्स (Hindi Edition)
    Dr. Bhimrao Ambedkar / DrBhimrao Ambedkar
    प्रस्तुत शीर्षक ’बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स’ से ऐसा आभास होता है कि यह इन दोनों व्यक्तियों के बीच समानता को बताने वाला है या विषमता को दर्शाने वाला है। इन दोनों के बीच समय का बहुत बड़ा अंतराल है। उनके विचार क्षेत्र भी अलग-अलग हैं। अतः इस शीर्षक का अजीब सा प्रतीत होना अवश्यंभावी है। मार्क्सवादी इस पर आसानी से हंस सकते हैं और मार्क्स तथा बुद्ध को एक समान स्तर पर लाने का मजाक व हंसी ...
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    13,11 €

  • Hindutwa Ka Darshan हिंदुत्व का दर्शन (Hindi Edition)
    Dr. Bhimrao Ambedkar / DrBhimrao Ambedkar
    हिंदुत्व का दर्शन क्या है? यह एक ऐसा प्रश्न है, जो सभी की तार्किक विचार श्रृंखला में उत्पन्न होता है, परंतु उसकी तार्किक श्रृंखला के अलावा भी इसका इतना महत्व है कि इसे बिना विचार किए छोड़ा नहीं जा सकता। इसके बिना हिंदुत्व के उद्देश्यों और आदर्शों को कोई समझ नहीं सकता।इस संबंध में यह बिल्कुल साफ है कि इस तरह का अध्ययन करने से पहले विषय की पृष्ठभूमि को स्पष्ट करना और साथ ही उससे स...
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  • Jati ka Unmoolan जाति का उन्मूलन (Hindi Edition)
    Dr. Bhimrao Ambedkar / DrBhimrao Ambedkar
    हिंदुओं को सोचना चाहिए कि क्या अभी तक उनके लिए यह स्वीकार करने का समय नहीं आया है कि कोई भी वस्तु स्थिर नहीं है, कोई भी वस्तु अपरिवर्तनीय नहीं है, कोई भी वस्तु सनातन नहीं है, प्रत्युत प्रत्येक वस्तु बदल रही है, अतएव परिवर्तन ही व्यक्ति और समाज के जीवन का नियम है। संसार की बदली हुई परिस्थिति के अनुकूल जो व्यक्ति या समाज अपने जीवन में परिवर्तन नहीं लाता, वह संसार के समुन्नत समाज ...
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    13,70 €

  • Bharat Mein Jati Pratha भारत में जातिप्रथा (Hindi Edition)
    Dr. Bhimrao Ambedkar / DrBhimrao Ambedkar
    भारत में जातिप्रथा विषय कितना जटिल है, जिसके संबंध में विचार व्यक्त करने हैं। अनेकों योग्य विद्वानों ने जाति के रहस्यों को खोलने का प्रयास किया है, किंतु यह दुःख की बात है कि यह अभी तक यह पूर्ण रूप से व्याख्यायित नहीं हुआ है और लोगों को इसके बारे में अल्प जानकारी है। मैं जाति जैसी संस्था की जटिलताओं के प्रति सजग हूं और मैं इतना निराशावादी नहीं हूं कि यह कह सकूं कि यह पहेली अगम,...
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  • Asprisyata अस्पृश्यता (Hindi Edition)
    Dr. Bhimrao Ambedkar / DrBhimrao Ambedkar
    समाज का उच्च समुदाय निम्न समुदाय से कार्य, जाति, परंपरा अथवा रूढ़ि के आधार पर छुआछूत का व्यवहार करता है तथा निम्न समुदाय को अस्पृश्य मानकर सार्वजनिक स्थलों में प्रवेश से वर्जित करता है, तो इसे ही सामान्य तौर अस्पृश्यता कहते हैं। भारत की वर्ण-व्यवस्था में जाति आधारित अस्पृश्यता की चलन रही है। हमारे संविधान निर्माता बाबा साहब अम्बेडकर ने प्रस्तुत पुस्तक ’अस्प्रीस्यता’ में इस सामाज...
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  • Krishna Aur Unki Gita कृष्ण और उनकी गीता (Hindi Edition)
    Dr. Bhimrao Ambedkar / DrBhimrao Ambedkar
    प्राचीन भारत के साहित्य में भगवद्गीता का क्या स्थान है? क्या यह हिंदू धर्म का उसी प्रकार का एक धर्मग्रंथ हैं, जिस प्रकार ईसाई धर्म की बाइबिल है। हिंदू इसे अपना धर्मग्रंथ मानते हैं। अगर यह धर्मग्रंथ है, तब यह वस्तुतः क्या शिक्षा देता है? यह किस सिद्धांत का प्रतिपादन करता है? इस विषय पर जो विद्वान कुछ कहने के लिए सक्षम हैं, उन्होंने इस प्रश्न के जो उत्तर दिए हैं, प्रस्तुत पुस्तक ...
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