Irfan Habib / Tr. Kanak / Vijay Kumar Thakur
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भारत के लोक इतिहास श्रृंखला के इस खंड का विषय 1500 ईसा पूर्व से 700 ईसा पूर्व के बीच का काल-खंड है जिसके तहत ऋग्वेद और उसके बाद के ग्रंथों को क्रमशः व्यवस्थित किया गया है और उस युग के भूगोल, प्रव्रजन, प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था और समाज के साथ-साथ धर्म और दर्शन आदि पहलुओं का अन्वेषण किया गया है | लेखकों की कोशिश रही है कि उक्त आदिग्रंथों के माध्यम से तत्कालीन जन-जीवन की पुनर्रचना कर आम पाठकों के लिए उसे बोधगम्य बनाया जाए | इस प्रक्रिया में लैंगिक और वर्ग-आधारित सामाजिक विभाजनों को खास तौर पर देखने की कोशिश की गई है | पुस्तक के एक अध्याय में पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर प्रमुख क्षेत्रीय संस्कृतियों का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया गया है | इतिहास में लोहे का आगमन एक महत्त्पूर्ण घटना है जो इसी युग में संपन्न हुई थी सो उसका वर्णन किंचित विस्तार से हुआ है | साथ ही जाति व्यवस्था के आरम्भ पर भी इस पुस्तक में अपेक्षित प्रकाश डाला गया है | मूल ग्रंथो के उद्धरणों, तार्किक व्याख्याओं और विश्लेषणों, अनेक प्रमाणिक चित्रों और नक्शों से समृद्ध यह पुस्तक न सिर्फ रुचिकर, बल्कि पाठकों को विचारोत्तेजक भी लगेगी |