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एक बेहद प्रतिष्ठित और ईमानदार मेडिकल ऑफिसर की अचानक हुई हत्या पूरे प्रदेश की नीरसता को भंग कर देती है। इसी दौरान पुलिस की नाकामी के बाद अपने पिता के हत्यारों और हत्या का मकसद जानने निकलता है स्पेस साइंटिस्ट अविनाश सिंह, जिसे इत्तेफाकन देश के सबसे बड़े मेडिकल घोटाले के बारे में पता चलता है। जिसके बाद इस घोटाले को छिपाने की कोशिश में कई जिंदगियां तबाह कर दी जाती हैं। अविनाश को इस तफ्तीश में दो पत्रकार और एक आरटीआई एक्टिविस्ट का साथ मिलता है। इस तहकीकात में हर उस शख्स को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है, जिसका नाम इस घोटाले में सामने आता है। लेकिन असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने में सीबीआई के भी हाथ-पैर फूल जाते हैं। अपराध और राजनीति के घालमेल के बीच एक के बाद एक रहस्यों से पर्दा उठता है। हर किरदार की अपनी एक कहानी सामने आती है, जो आखिरी पन्ने तक पाठक को बांधे रखती है। यह उपन्यास पूरे समय रहस्य और रोमांच बरकरार रखता है। इस पूरे घटनाक्रम के जरिए आज की राजनीति के जातीय समीकरण, सरकारी योजनाओं के लिए मिलने वाले फंड में नेता-अधिकारियों की बंदरबांट, केंद्र और राज्य सरकारों का टकराव, सत्ता पाने के लिए राजनीतिक समझौते, केंद्रीय जांच एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल, माफिया की निजी जिंदगी, उनके अपराध जगत में आने की कहानियां, उनकी महत्वाकांक्षाओं आदि को रोचक अंदाज में पेश करने की कोशिश की गई है।