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क्या आप वाक़ई सही तरीक़े से संवाद की शुरुआत करते हैं?कामकाजी संवाद हमेशा संक्षिप्त तथा स्पष्ट होना चाहिए और आपको जल्द से जल्द मुद्दे की बात पर आ जाना चाहिए। दिक़्क़त यह है कि हमें ऐसा करना आता नहीं है; किसी ने कभी इस बारे में हमें कुछ बताया ही नहीं है। संवाद को संक्षिप्त रखने का क्या मतलब होता है? किसी जटिल विषय/मसले को कुछेक वाक्यों में कैसे समेटा जा सकता है?यह पुस्तक आपको दिन-प्रतिदिन की कार्य-स्थितियों में सभी तरह के कामकाजी संवादों की स्पष्ट एवं संक्षिप्त शुरुआत की दिशा में कदम-दर-कदम आगे बढ़ाने वाली मार्गदर्शिका है।पहले मिनट के नियम का मतलब यह नहीं है कि आप सारी की सारी बातें 60 सेकण्ड्स में ही कह देने की कोशिश करने लगें। इस नियम के मुताबिक़ पहले मिनट में आपके संवाद का प्रयोजन स्पष्ट हो जाना चाहिए, एक बार में एक ही विषय/मुद्दे पर बात होनी चाहिए, और समस्याओं की बजाए समाधानों पर ध्यान केन्द्रित किया जाना चाहिए।पुस्तक में ऐसे उपायों की भरमार है, जिनकी मदद से आप जानेंगे कि :• संक्षिप्त किन्तु प्रभावशाली कामकाजी संवाद तथा बैठकें कैसे की जाएँ।• इधर-उधर की बातों में समय गँवाए बिना शीघ्रता से मुद्दे की बात पर कैसे आया जाए।• अपने श्रोताओं को मनचाहे समाधान की और कैसे ले जाया जाए।• कैसे एक ही उपाय/तकनीक को तक़रीबन सभी कामकाजी संवादों पर लागू करके शानदार परिणाम हासिल किए जाएँ।