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यह पुस्तक शूद्रों के इतिहास और भारतीय समाज में उनकी स्थिति पर केंद्रित है। लेखक, भीमराव अम्बेडकर, शास्त्रीय ग्रंथों, पुरातात्विक साक्ष्यों और मौखिक परंपराओं सहित विभिन्न स्रोतों का उपयोग करके शूद्रों के जीवन और अनुभवों का चित्रण करते हैं।पुस्तक निम्नलिखित बिन्दुओं पर विस्तृत बात करती है• प्राचीन भारत में शूद्रों की उत्पत्ति और सामाजिक स्थिति• वर्ण व्यवस्था में शूद्रों का स्थान• शूद्रों के व्यवसाय और आर्थिक जीवन• शूद्रों की शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियां• शूद्रों के धार्मिक विश्वास और प्रथाएं• मध्यकालीन और आधुनिक भारत में शूद्रों का सामाजिक-राजनीतिक संघर्ष यह पुस्तक शूद्रों के इतिहास और भारतीय समाज में उनकी भूमिका पर एक व्यापक और सूचनात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है। यह जाति व्यवस्था और भारतीय समाज में सामाजिक असमानता के मुद्दों को समझने में मदद करती है। यह शूद्रों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष के बारे में जागरूकता बढ़ाती है।