Librería Samer Atenea
Kálamo Books
Librería Elías (Asturias)
Librería Kolima (Madrid)
Librería Proteo (Málaga)
लेखिका अदिति श्रीवास्तव जी की कृति 'शून्य के बाद' इनकी प्रथम पुस्तक अवश्य है, किंतु इनकी लेखनशैली में जो परिपक्वता और गहराई दिखाई देती है, वह किसी अनुभवी रचनाकार से कम नहीं लगती।इनकी रचनाएँ भावनाओं की सतही अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि आत्मानुभूति की गंभीर परतों से उपजी संवेदनाएँ हैं।शब्दों के चयन में सादगी होने के बावजूद अर्थ की व्यापकता पाठक को लंबे समय तक बाँधे रखती है।कवियित्री अदिति जी का रचनाऍं पाठक को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि अनुभव करने के लिए आमंत्रित करती हैं।इनकी कविताओं में एक सूक्ष्म दार्शनिक दृष्टि भी परिलक्षित होती है।यह कृति भावनात्मक ईमानदारी और अभिव्यक्ति की स्वाभाविकता का सशक्त उदाहरण है।'शून्य के बाद' पाठकों को आत्ममंथन की एक गहन यात्रा पर ले जाती है, जहाँ हर पाठक स्वयं को किसी न किसी रूप में प्रतिबिंबित पाता है।लेखिका की यह प्रथम प्रस्तुति उनके सशक्त रचनात्मक भविष्य की स्पष्ट झलक देती है।यह पुस्तक समकालीन हिंदी काव्य में एक प्रभावशाली और संभावनाशील हस्ताक्षर का परिचय कराती है।निस्संदेह, अदिति श्रीवास्तव का यह प्रयास साहित्यिक जगत में एक उल्लेखनीय आरंभ के रूप में देखा जाएगा।