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हिमालय की पवित्र गोद में स्थित पूर्णागिरी धाम केवल एक मंदिर नहीं, यह शक्ति, श्रद्धा और साधना का जीवंत स्वरूप है।
जहाँ देवी सती का नाभि अंश गिरा, वहीं से प्रकट हुई वह दिव्य ऊर्जा जिसे आज हम माता पूर्णागिरी के नाम से जानते हैं। यह धार्मिक और आध्यात्मिक ग्रंथ पाठकों को सृष्टि के आदिकाल से लेकर शक्तिपीठों की स्थापना तक की गहन यात्रा पर ले जाता है।
इस पुस्तक में देवी सती की महागाथा, शिव शक्ति का दिव्य मिलन, दक्षयज्ञ की घटना, शक्तिपीठों का रहस्य, और पूर्णागिरी धाम की अलौकिक महिमा का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत है।
यह केवल कथाओं का संग्रह नहीं, बल्कि भक्ति का अनुभव, आस्था की ऊर्जा, और माँ के सान्निध्य का भावनात्मक स्पर्श है।
जो भी भक्त सच्चे मन से माता पूर्णागिरी का स्मरण करता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता।
'पूर्णागिरी धाम - एक धार्मिक ग्रंथ' हर उस साधक और श्रद्धालु के लिए है जो जीवन में शक्ति, शांति और विश्वास की खोज में है।
जय माँ पूर्णागिरी