Ed. Abdul Mugni / Ismat Chugtai / Tr. Shabnam Rizvi
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शादी इस्मत चुगताई उर्दू की सम्पूर्ण गद्यकार हैं ! उन्होंने न सिर्फ अफ़साने और उपन्यास लिखे, बल्कि अन्य कई विधाओं में भी अपनी कलम के हुनर का लोहा मनवाया ! उनके आत्मकथात्मक लेखन का पैनापन देखते ही बंटा है ! समाज के साथ अपने ऊपर हँसने की खूबी, गहरा व्यग्य और सुथरा हास्यबोध उन्हें अपने दौर के बाकी कथाकारों से विशिष्ट बनाता है ! फिर अपने स्त्री होने का उनका अहसास और सो भी एक ऐसी स्त्री जिसे बनी बनाई लकीरों से अलग हटकर चलने का कुछ चस्का-सा है, उन्हें अपने समय से भी आगे का विजनरी साबित करता है ! आज वे जितनी उर्दू की हैं उतनी ही हिंदी की भी हो चुकी हैं ! उनकी ज्यादातर रचनाएँ हिंदी में उपलब्ध हैं ! हिंदी में उनकी उर्दू रचनाओं का आना हमेशा पाठकों को उत्तेजित करता रहा है ! ख़ास तौर से उनकी कहानियां जो आज भी लोकप्रियता के उसी शिखर पर हैं, जैसी वे उनके जमाने में थीं ! इस किताब में उनकी कुछ चर्चित कहानियों के अलावा उनके कुछ छोटे ड्रामों को भी शामिल किया गया उनका एक लेख भी इसमें रखा गया है जो उनके उत्कृष्ट संस्मरणात्मक गद्य का नमूना है !