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समझदारी से कहो ’ना’ : नशा मुक्त भारत-: 'किशोरावस्था वह दौर है जहाँ जिज्ञासा, दबाव, भावनाएँ और पहचान एक-दूसरे से टकराती हैं। ऐसे समय में नशे जैसे पदार्थ अक्सर ’मज़ा’, ’राहत’ या ’फिट-इन’ होने का झूठा रास्ता बनकर सामने आते हैं। यह पुस्तक उसी सच्चाई को सरल, वैज्ञानिक और किशोर-अनुकूल भाषा में खोलती है।वंदना वर्मा द्वारा लिखित 'समझदारी से कहो ’ना’' केवल एक चेतावनी नहीं है-यह एक साथी, मार्गदर्शक और सुरक्षा ढाल है। इसमें नशे की लत क्या है, यह दिमाग और शरीर को कैसे प्रभावित करती है, सोशल मीडिया और सहकर्मी दबाव क्या भूमिका निभाते हैं, शुरुआती संकेत कैसे पहचानें, और मुश्किल घड़ी में क्या करें-इन सभी पहलुओं को वास्तविक कहानियों, चेकलिस्ट, अभ्यास और सकारात्मक उदाहरणों के साथ समझाया गया है।यह पुस्तक बच्चों, किशोरों, शिक्षकों और अभिभावकों-सभी के लिए एक आवश्यक संसाधन है, जो एक सुरक्षित, आत्मविश्वासी और नशा-मुक्त भविष्य की दिशा दिखाती है।⭐ BULLET POINTS ⭐• नशीले पदार्थों की लत का वैज्ञानिक, सरल और किशोर-अनुकूल परिचय• सहकर्मी दबाव, पार्टियों और सोशल मीडिया का वास्तविक प्रभाव• तनाव, चिंता, अवसाद और भावनात्मक समस्याओं से सुरक्षित मुकाबला• वास्तविक कहानियाँ, गतिविधियाँ और आत्म-जांच चेकलिस्ट• 'ना' कहने के स्मार्ट स्क्रिप्ट और जीवन कौशल• मानसिक स्वास्थ्य, पुनर्प्राप्ति और सहायता संसाधनों का स्पष्ट मार्गदर्शन•स्कूल और परिवार में नशा-मुक्त संस्कृति बनाने के उपाय