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डॉ. मोहन राव मधुकर राव भागवत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक हैं। वे संघ का प्रमुख बनने वाले सबसे कम आयु के व्यक्तियों में से एक हैं। उन्हें 21 मार्च, 2009 को संघ के पांचवें सरसंघचालक के.एस. सुदर्शन ने अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। उन्हें एक स्पष्टवादी, व्यावहारिक और दलगत राजनीति से संघ को दूर रखने के एक स्पष्ट दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। उन्होंने हिंदुत्व के विचार को आधुनिकता के साथ आगे ले जाने की बात कही है। उन्होंने बदलते समय के साथ चलने पर बल दिया है, इसके साथ ही संगठन का आधार समृद्ध और प्राचीन भारतीय मूल्यों में दृढ़ बनाए रखा है। सादा जीवन जीने वाले तथा उच्च विचार धारण करने वाले मोहन भागवत अपनी उन्नत प्रतिभा के कारण हिंदू धर्म, विभिन्न जातियों तथा देश-विदेश के लोगों के बीच महान आदर्श के रूप में स्वीकार्य रहे हैं। उन्होंने संघ और भाजपा के बीच जबरदस्त संतुलन कायम किया।हिंदू समाज में व्याप्त अस्पृश्यता के विरोधी, अविवाहित रहकर अपना समस्त जीवन देश के उत्थान के लिए समर्पित कर देने वाले इस राष्ट्रनायक के दृष्टिकोण और विचारों से समूचा भारतीय समाज प्रेरित है।