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द्रौपदी मुर्मू भारत की नवनिर्वाचित 15वीं राष्ट्रपति हैं। उन्हें किसी और परिचय की आवश्यकता नहीं है। लेकिन अगर आप ओडिशा के एक अनजान आदिवासी गांव से देदीप्यमान रायसीना हिल्स तक की उनकी अद्भुत यात्रा के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके पढ़ने लायक है। द्रौपदी के साधारण किन्तु असाधारण जीवन- उनकी आदिवासी पृष्ठभूमि, उनके संघर्षों और विजयों, व्यक्तिगत त्रासदियों और विपत्तियों के बारे में प्रोफेसर गोपाल शर्मा की लेखनी से निकली यह उत्कृष्ट जीवनी आपको अपने साथ बांध ले जाएगी।पुस्तक को तैयार करने के लिए लेखक ने राष्ट्रपति मुर्मू के पैतृक गांव की यात्रा की और ग्राम वासियों से मिलकर इस कहानी का ताना-बाना बुना। पुस्तक न केवल आपको उनके जीवन से परिचित कराती है बल्कि आपको यह समझने और विचार करने का अवसर भी देती है कि कैसे एक राजनीतिक व्यवस्था में जहां वंशवादी राजनीति और अकूत धन -संपत्ति लंबे समय से हावी रही है, मितव्ययी साधनों और संसाधनों वाले व्यक्ति को भी अपनी ईमानदार कोशिशों की बदौलत असाधारण सफलता और चरम उपलब्धि प्राप्त हो सकती है। अपने आप में अग्रगण्य द्रौपदी मुर्मू एक ऐसा प्रतीक हैं जिन्हें आप और अधिक समावेशी दुनिया की आशा में आइकन(अनुकरणीय आदर्श प्रतीक) के रूप में देख सकते हैं।प्रेरक व्यक्तित्व की प्रेरणास्पद गाथा -पठनीय ही नहीं संग्रहणीय भी!