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प्रेमचंद एक युग के लेखक कहे जाते हैं। नाट्य मंचन से भी प्रेमचंद रंग निर्देशकों के सर्वाधिक प्रिय लेखकों में आते हैं। मुख्यतः प्रेमचंद अपने कथा साहित्य एवं उपन्यास के लिए जाने जाते हैं क्योंकि यह बहुत कम लोगों को पता है कि उन्होंने नाटक भी लिखें हैं। प्रेमचंद ने ’संग्राम’, ’कर्बला’ और ’प्रेम की वेदी’ जैसे नाटकों की रचना की है, जिनमें प्रेमचंद की नाट्य कला का पूर्ण विकास देखा जा सकता है। प्रेमचंद की कहानियों में कथावस्तु, पात्र, भाषा और संवाद ये सभी विशेषताएँ देखने को मिलती हैं। उनके द्वारा रचित हर एक कहानी नाटक के सभी तत्त्वों को अपने अंदर समेटे हुए हैं। शायद यही वजह है कि इस पुस्तक 'प्रेमचंद मंच पर' के लिए उनकी सर्वश्रेष्ठ कहानियों में से किन्हीं चार कहानियों का चयन कर उनका नाट्य रूपांतरण करना मेरे लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य था। प्रेमचंद की कहानियों को जब पन्नों पर नाटकों की शैली में उकेरने की मशा हुई, तो मेरी इस मंशा या मेरी इस सोच को आकार देने में प्रभाकर प्रकाशन ने मेरा भरपूर सहयोग किया। प्रभाकर प्रकाशन ने प्रेमचंद की कहानियों के नाट्य रूपांतरण को प्रकाशित करने का बीड़ा उठाया। जब एक लेखक और एक प्रकाशक की सोच मिलती है, तो एक अच्छी पुस्तक का निर्माण अवश्य होता है, जो पाठकों के हृदय को छूती है। प्रभाकर प्रकाशन के सहयोग के लिए में उनका हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ।