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'पटना बाढ़ 1975' बिहार के इतिहास की एक ऐसी त्रासदी पर आधारित पुस्तक है, जिसने हजारों लोगों के जीवन, शहर की व्यवस्था और समाज की संवेदनशीलता को गहराई से प्रभावित किया। यह पुस्तक केवल बाढ़ की घटना का वर्णन नहीं करती, बल्कि उस समय के सामाजिक, प्रशासनिक और मानवीय पक्षों को भी सामने लाती है।लेखक संतोष सुमन ने इस पुस्तक में 1975 की पटना बाढ़ के भयावह दृश्य, लोगों के संघर्ष, राहत कार्यों, सरकारी तैयारियों की कमियों और आम जनता की पीड़ा को विस्तार से प्रस्तुत किया है। पानी में डूबती गलियों, घरों से बेघर होते परिवार, जीवन बचाने की जद्दोजहद और संकट के समय उभरती मानवीय संवेदनाएँ इस पुस्तक को बेहद प्रभावी बनाती हैं।यह पुस्तक पाठकों को उस दौर में ले जाती है, जब प्राकृतिक आपदा ने पटना को पूरी तरह झकझोर दिया था। साथ ही यह भी दिखाती है कि संकट के समय समाज, प्रशासन और आम आदमी की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण हो जाती है।'पटना बाढ़ 1975' उन पाठकों के लिए उपयोगी और महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो बिहार के इतिहास, प्राकृतिक आपदाओं, सामाजिक परिस्थितियों और मानवीय संघर्षों को गहराई से समझना चाहते हैं। यह पुस्तक एक ऐतिहासिक दस्तावेज के साथ-साथ संवेदना, साहस और स्मृति की जीवंत अभिव्यक्ति भी है।