'Jagdishji' Jagdish Chandra Joshi
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पद्य सुमनांजलि॥ तथा स्तुतिसार समुच्चय ॥ पुष्परूपी कविताएँप्रभु के असीम अनुग्रह से इस प्रकार १०१ पुष्पों की यह पुष्पांजलि, जिसे 'पद्य सुमनांजलि' नाम दिया गया है, प्रभु के ही श्रीचरणों में समर्पित हुई।ये १०१ पुष्प, जिन्हें 'सुमन' नाम दिया गया है, इस सोच के साथ प्रस्तुत किए गए हैं कि ये सुमन केवल पुष्परूपी कविताएँ ही नहीं, बल्कि सु अर्थात् सुंदर मन के प्रतिबिंब हैं। ये लेखक तथा पाठक - दोनों के मन की सुंदरता और सुंदर मनोभावों को अभिव्यक्त करते हैं।ये कविताएँ माँ सुमना सरस्वती की कृपा-सार हैं, जिन्हें मैंने कल्पनाओं एवं वास्तविकताओं के उपवन से अपनी अनभिज्ञ कलम से चुना है। इसमें जो कुछ भी अच्छा है, वह सब ईश्वर की कृपा है; और जो भी त्रुटियाँ हैं, वो सब मेरी अपनी हैं।प्रणत-जगदीश जोशी