Kritika & Sharma Ashok K. Bhardwaj
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पहली नज़र में, मलाला युसुफजई, एक नाजुक, कमसिन और पड़ोस में ही रहनेवाली कोई साधारण बालिका सी दिखती है। 17 साल की इस मासूम बच्ची के हौसलों की चट्टान से टकराकर इस्लामी आतंक का पर्याय बने तालिबान की अकड़ को चूर-चूर होते पूरी दुनिया ने देखा है। मलाला वो नाम है जिसकी बदौलत आज तक अशांति, आतंक और अपराधों के लिए बदनाम पाकिस्तान को पूरी मानवता ने इज्जत की नज़र से देखना शुरू किया है। मलाला नोबेल पुरस्कार विजेताओं के इतिहास का सबसे युवा चेहरा और विश्व में नारी-समानता, शिक्षा और मुक्ति की पहचान बन गयी है। कभी मलाला ने लड़कियों की पढाई पर तालिबानी रोक के खिलाफ आवाज उठायी थी और तालिबानी हत्यारों ने 9 अक्टूबर 2012 को उसे गोली मार दी थी, मौत को मात देकर आज वही लड़की पूरी दुनिया में महिलाओं के आत्म गौरव का आदर्श बन गयी है।