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’मुश्क’ काव्य संग्रह,में किर्ति के दास्तानें-इश्क एवम् उसके प्रेम प्रसंगों का मार्मिक चित्रण बड़ी प्रवीणता के साथ उल्लेख किया गया है । कविताओं में मुख्यत: उसका अपने प्रेमी, प्रभु, अंतर्मन एवं पति संग किए गए संवाद का अति रोचक विवरण है । प्रेम में सनी इन कविताओं में बहारों की खुशबू, हास्य की गूंज, विरह का गम, सामाजिक व्यंग्य, मिलन की उमंग एवं प्रभु का अहसास हर क्षण, जैसे विविध नित्य एहसासों का समन्वय का अद्भुत लक्षण, पूर्णतया किर्ति के भावों को अभिव्यक्त करता है । नैना असीजा की लेखनी मुख्यत: खड़ी भाषा में है, परन्तु उनकी संरचना में पंजाबी व उर्दू शब्दावली का इस्तेमाल भी भरपूर है। शब्दों का मायाजाल वह इस प्रकार बुनती है कि जैसे मानों शब्दिक चित्रण करती हों। ’मुश्क’ द्वारा जगत में वे प्रेम, हास्य, उल्लास एवं मुस्कान के बीज रोपित करती हैं।