Librería Samer Atenea
Librería Aciertas (Toledo)
Kálamo Books
Librería Perelló (Valencia)
Librería Elías (Asturias)
Donde los libros
Librería Kolima (Madrid)
Librería Proteo (Málaga)
चौथे सवाल का जवाब है - मूर्ति उपासनारहस्य कुछ सवाल ऐसे हैं, जो आज तक सवाल ही बनकररह गए हैं। कर्इं लोगों ने इनके जवाब दिए हैं लेकिन फिर-फिर से इन सवालों को उठायाजाता है। ये सवाल हैं- ईश्वर है या नहीं? सरश्री ने इसके जवाब में कहा है, ’ईश्वर हीहै, तुम हो कि नहीं, पहले यह पक्का करो, पता करो।’ दूसरा सवाल है- कर्म बड़ा या भाग्य बड़ा?तीसरा सवाल है- मरने के बाद जीवन है या नहीं है? चौथा सवाल है- मूर्तिपूजा करें यान करें? ईश्वर निर्गुण निराकार है या सगुण साकार है? प्रस्तुत पुस्तक में इस चौथे सवाल को उठायागया है। पाठकों से निवेदन है कि पुस्तक पढ़ते वक्त बीच में कोई राय कायम ना करें। यहपुस्तक एक छोटा सा प्रयास है, सत्य के खोजियों के लिए। खोजी यानी जो सत्य की खोज मेंनिकल पड़ा है और सत्य ने उसे खोज लिया है। जब सत्य (ईश्वर) हमें खोज लेता है, चुन लेताहै तब ही हममें प्यास जाग्रत होती है। उम्मीद है कि आप भी एक खोजी हैं और आपकेमन में इस वक्त ऐसा कोई सवाल नहीं है कि यह पुस्तक पढ़ें या ना पढ़ें! हमें पूर्ण विश्वास है कि इस पुस्तक मेंदी गई समझ को आत्मसात कर, आपके मूर्तिपूजा संबंधि समस्त भ्रम मिटेंगे और आप निराकार-साकार,आस्तिक-नास्तिक इन सभी लेबल से परे होकर शुद्ध सत्य (ईश्वर) को जान पाएँगे।