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काश से आकाश की ओर’काश! ऐसा होता... काश! वैसा होता... काश! मुझे यह मिल जाता... काश! मैं ऐसा होता... काश! बारिश होकर मौसम सुहावना हो जाए... काश! बारिश रुक जाए तो कपड़े सूख जाएँ ..।’ इंसान का जीवन हर पल ’काश!’ की अंतहीन सूची से भरा पड़ा है। ’काश!’ एक ऐसी मृगतृष्णा का नाम है जो इंसान को पूरे जीवन अतृप्त और निराधार इच्छाओं के रेगिस्तान में भटकाती रहती है। जहाँ इंसान को दुःखों और निराशा के सिवाय कुछ हाथ नहीं आता और उसका पूरा जीवन यूँ ही व्यर्थ चला जाता है। जब हम अपने जीवन को वह जैसा है, वैसा नहीं स्वीकारते तब हम ’काश!’ की डूबती कश्ती में सवार होकर स्वयं को दुःख, निराशा, अवसाद की भँवर में डुबो लेते हैं।यह पुस्तक आपको इस काश के चंगुल से मुक्त कराकर आकाश (पूर्ण आनंद) की कश्ती में सैर कराने के लिए निमित्त बनकर आई है। इसे गंभीरता से पढ़ें, अपने जीवन में चुभनेवाले ’काश’ के काँटों को खोज-खोजकर निकालें और उनसे मुक्त होकर आकाश की मुफ्त सैर का आनंद लें। इस सैर के दौरान आपके सामने जीवन की खूबसूरती और महान रहस्य उजागर होंगे।आकाश की इस आनंदमयी यात्रा के लिए आपको हमारी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएँ, हॅपी थॉट्स।