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'मंटो' प्रसिद्ध उर्दू लेखक सआदत हसन मंटो की कहानियों का संग्रह है, जो समाज की सच्चाइयों को बेबाकी और साहस के साथ प्रस्तुत करता है। इस पुस्तक में मंटो ने विभाजन के दौर की त्रासदी, इंसानियत की टूटन और समाज की नैतिक जटिलताओं को गहराई से चित्रित किया है। उनकी रचनाएँ जैसे टोबा टेक सिंह, ठंडा गोश्त, और खोल दो मानव मन की पीड़ा और उस समय की हिंसा को उजागर करती हैं।मंटो की लेखनी सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली है। वे समाज के उन तबकों की कहानी कहते हैं जिन्हें अक्सर अनदेखा किया जाता है - वेश्याएँ, शरणार्थी, पागल और गरीब। उनके पात्र इंसानियत के असली चेहरे को सामने लाते हैं, जहाँ अच्छाई और बुराई की सीमाएँ धुंधली हो जाती हैं।यह पुस्तक केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि एक दर्पण है जो समाज की कड़वी सच्चाइयों को दिखाता है। मंटो ने कभी वास्तविकता को सजाया नहीं, बल्कि उसे उसी रूप में लिखा जैसा उन्होंने देखा। उनकी रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, क्योंकि वे हमें याद दिलाती हैं कि सच्चाई, इंसानियत और संवेदना ही साहित्य की सबसे बड़ी शक्ति हैं।