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रोहतक (हरियाणा) में 17 फरवरी 1918 को जन्मी ’लोक गीत’ की लेखिका श्रीमती लीलावती बंसल ने हिंदी साहित्याकाश में अपना विशिष्ट स्थान बनाया है। गद्य तथा पद्य में इन्हें कई पुस्तकें लिखने का श्रेय प्राप्त है। आपकी कृतियों में ’यश मालिका’, ’शूल और फूल’, ’पीर जगाई तुमने’, ’ताप और तुषार’ प्रमुख हैं।लोकसाहित्य के क्षेत्र में आपने प्रशंसनीय कार्य किया है। धूलधूसरित मणियों की सहलेखिका के रूप में आप उ.प्र. सरकार द्वारा पुरस्कृत की जा चुकी हैं। प्रस्तुत पुस्तक आपकी नवीनतम कृति है। आशा है यह पाठकों को ज्ञान के नए आयामों से परिचित कराएगी।