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भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री निष्काम कर्मयोगी थे, राजनीति के दलदल में रहकर भी वे राजनीति की कुटिलताओं एवं दुश्चक्रों से मुक्त थे । उनके ऊपर सांसारिक आवरणों का प्रभाव नहीं पड़ता था, क्योंकि वे संसार में रहते हुए भी संसारी नहीं थे । उन्होंने अपनी आत्मशक्ति इतनी विकसित कर ली थी कि उन्हें सर्वत्र उसी परम सत्ता के दर्शन होते थे, जिसके इशारे पर सभी सांसारिक प्राणी स्वकर्मरत हैं । उनका जीवन-दर्शन झील के पानी की तरह साफ, स्वच्छ और तलस्पर्शी है, उसकी प्रति ध्वनि आप अपनी आत्मा की आवाज की तरह स्पष्ट सुन सकते हैं ।