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कवयित्रक सारिका तिवारी ( वन्दना ) का जन्म उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव 1जुलाई 1980 को जननी श्री मती निर्मला शुक्ला ( चुन्नी ) की पावन कोख एवं जनक श्री कल्याण शंकर शुक्ला के पौरूष से हुआ । इनका पालन पोषण विराट व्यक्तित्व के धनी बाबा श्री जगदीश नारायण शुक्ल के सुन्दर सानिध्य में हुआ । जिन्होने प्राथमिक विद्यालय में प्रधान अध्यापक पद पर सुशोभित होते हुए राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त किया । और अपने शिष्ट आचरण और कर्मठ व्यक्तित्व के धनी ,क्षमा शीलता के साथ अपनी पोती का लालन पालन भी किया । उनके गुण सारिका (वन्दना) मे पूर्णरूप से दृष्टिगोचर होते है । बचपन से ही होनहार वन्दना अपने आप में ही काव्य सारिका के गुणों को दर्शाती है ।भाषा सहज ,सरल,सुबोध एवम भावानुगामिनी है ।और निरन्तर अपनी साहित्यिक साधना में रत है ।’काव्य सारिका ’ के गीत, कविता ,कहानी ,संस्मरण अपने आप में एक अलौकिक अनुभूति है जो पाठक को बर्बस ही अपनी ओर आकृष्ट करने वाली रचनाए है ।