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मनीष भार्गव का जन्म मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की नरवर तहसील के ग्राम पंचायत सोन्हर में एक कृषक परिवार में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय पनघटा (नरवर) जिला-शिवपुरी से हुई। इन्होंने जीवाजी विश्विद्यालय, ग्वालियर से गणित व शिक्षाशास्त्र में स्नातक तथा इतिहास, अर्थशास्त्र व कंप्यूटर से परास्नातक की उपाधि हासिल की। इसके बाद इन्होंने मध्यप्रदेश शासन के कई विभागों में अलग अलग पदों पर रहकर 5 वर्ष से अधिक अपनी सेवाएँ दीं तथा वर्तमान में दिल्ली सरकार में शिक्षक परामर्शदाता के पद पर कार्यरत हैं। इनका चर्चित उपन्यास ’बेरंग लिफ़ाफ़े’ जहाँ इनके जीवन के विद्यार्थी जीवन व प्रशासनिक संघर्षों की कहानी थी तो वहीं दूसरा उपन्यास ’नल दमयंती सतयुग की अमर गाथा’ पौराणिक कथा थी। यह किताब ’कचहरीनामा’, सरकारी कार्यालय व जीवन के आम अनुभवों पर आधारित है, जिसे पढ़कर आप अपने आसपास की घटनाओं को सिर्फ देखेंगे ही नहीं बल्कि जिएँगे भी। यह ’वोकल’ एवं ’बोलकर’ जैसे कई डिजिटल प्लेटफार्म पर एक प्रेरक वक़्ता के रूप में लोगों को मार्गदर्शन करते हैं, जहाँ इन्हें 4 करोड़ से ज्यादा बार सुना गया है।