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मेरी कविता संग्रह की एक ही वजह है-उलझनयह उलझन जब मन के सभी दीवारों को तोड़कर कलम के रास्ते स्याही के सहारे पन्नों पर उतर जाती है तो कविता बन जाती हैइसी उलझन ने भावनाओं को जन्म दिया हैऔर फिरइसी उलझन ने रचनाओं को जन्म दिया हैकिसी की खोज नहीं, कुछ पा लाने की चाह नहीं, कोई हसरत नहीं कोई रास्ता या मुकाम नहींबस दुनिया ऐसी क्यों है, इसी की उलझन ने परेशान कर रखा हैहर मोड़ पे इंसान को रुक कर खुद को खंगालना और फिर तराशना चाहिएशायद इसी उलझन और परेशानियों ने मेरी कविताओं को संवारा हैज़िन्दगी के इसी उलझन से जूझते हुए मैंने कुछ रचनाओंको जन्म दिया हैकोई बड़ा फलसफा नहींकुछ हलकी फुलकी सी दिल की बातेंकोई बड़ा सिद्धांत नहींबस मन भारी हो जाने पेकलम से बह जाने वाली पीड़ापाठकों से बस एक ही निवेदन हैदुनिया जैसी होनी चाहिए थी वैसी तो नहींऐसे माहौल में शिवेंद्र की कविताएं ही सहीतुम्हे पन्नों में अपना अक्स मिले तो रो न देनाअब कहाँ मिलते हैं कविता में आईने कहीं