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नरेन्द्र कोहली के लेखन का विकास उनकी कहानियों के माध्यम से हुआ है। अपनी रचनाओं के विषय-वस्तु का चुनाव उन्होंने समाज से किया है। इसलिए उनकी रचनाएं हमें हमसे पुनः परिचित कराती हुई आभासित होती हैं। नरेन्द्र कोहली कथा, उपन्यास, कहानी, व्यंग्य समान अधिकार से लिखते हैं। उनके एक व्यंग्य से पाठक के मन में अनेक कथाएं जन्म लेती हैं और एक कथा से व्यंग्य की उत्ताल लहरें ठाठें मारने लगती हैं। ऐसा प्रखर, सार्थक, निर्माणधर्मा तथा वैविध्यपूर्ण व्यंग्य नरेन्द्र कोहली की ही विशेषता है।प्रस्तुत कहानी संग्रह में नरेन्द्र कोहली की सत्ताईस रचनाएं संग्रहीत की गई हैं। लेखक के अनुसार इन व्यंग्य रचनाओं का सृजन किसी मानसिक यातना से अत्यंत पीड़ा की अवस्था में तड़पते हुए हुआ है।