Librería Samer Atenea
Kálamo Books
Librería Perelló (Valencia)
Librería Elías (Asturias)
Librería Kolima (Madrid)
Librería Proteo (Málaga)
डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी देश के महापुरुषों की शृंखला में वह नाम है जिसने अपना सम्पूर्ण जीवन देशहित में लगाकर देश का विभाजन रोकने का भरसक प्रयत्न किया। लेकिन फिर भी उनका वह प्रयास व्यर्थ गया। उनके अथक प्रयासों के कारण ही समस्त बंगाल को बचाया जा सका अन्यथा पूरा बंगाल दूसरा पाकिस्तान बन गया होता ।डॉ. मुखर्जी एकमात्र ऐसे नेता थे, जिन्होंने न केवल स्वतंत्रता से पहले देश के लिए संघर्ष किया, बल्कि स्वतंत्रता के बाद देश की एकजुटता के लिए प्राण दिए । 1950 में जब ’नेहरू-लियाकत’ समझौता हुआ और बंगाली हिन्दू अल्पसंख्यकों के हितों पर कुठाराघात हुआ तो उन्होंने केंद्र सरकार से त्यागपत्र दे दिया । जो उन्होंने कश्मीर के लिए किया, वह भारतीय अस्मिता बचाए रखने के लिए किया ।