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क्या आप ऐसा महसूस करते है की आप एक आत्मिक पिजड़े में है, जहाँ से आप बाहर नहीं निकल पा रहे, एक ही पाप को बार-बार दोहराते रहते है? मुमकिन है कि आप परमेश्वर के नियति के अनुसार जीने के बजाय अपने माता-पिता के पापी प्रवृतियों को जी रहे हैं। अगर आप दो कदम आगे बढ़ा करतीन कदम पीछे जाने की परिस्थिति से थक चुके हैं तो पवित्र आत्मा 'स्वतंत्र हो' की चाबी का उपयोग करते हैं ताकि आपको उस सीमा और गतिहीनपिंजड़े से बाहर निकाल कर आज़ादी की ओर ले जाये! स्वतंत्र होने से...- आत्मिक संसार के वास्तविकता के विषय में आपकी आँखों से तराज़ू हट जायेगा, और ना केवल आपकी समस्याओं के लक्षणों से निपटने के औज़ारदेगा परन्तु उनको निकलेगा भी;- यह विचार कि, श्राप और राक्षसों/शैतान केवल तीसरी दुनिया के देशो के समस्याएँ नहीं हैं, को चुनौती देती है;- दर्शातें हैं कि शैतान मनों में गढ़ बनाने, और एक व्यक्ति के जीवन को नाश करने आते हैं;- हमेशा के लिए परिभाषित करते है की स्वतंत्रता वास्तिविकता में क्या है;- स्वतंत्रता में बने रहने और ज़ंजीर से बंधे ज़िंदगी में वापस ना लौटने के विषय में प्रायोगिक उपयों को बताते है।