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गोपाल शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ’भारतीय अंग्रेजी साहित्य का इतिहास’ हिन्दी जगत में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रयास है। यह पुस्तक लगभग 200 वर्षों के भारतीय अंग्रेजी लेखन की विकास यात्रा को हिन्दी भाषा के माध्यम से प्रस्तुत करती है।इस पुस्तक की मुख्य विशेषताएं और परिचय निम्नलिखित हैः• उद्देश्य और आवश्यकताः पुस्तक का मुख्य लक्ष्य भारतीय अंग्रेजी साहित्य के प्रति हिन्दी पाठकों और अध्येताओं की अनभिज्ञता को दूर करना है। लेखक के अनुसार, जहाँ अंग्रेजी लेखन वैश्विक स्तर पर चर्चित रहा, वहीं हिन्दी जगत ने अक्सर इसकी उपेक्षा की है। यह ग्रंथ उस ऐतिहासिक रिक्तता को भरने का कार्य करता है।• विषय विस्तारः पुस्तक केवल कविता या उपन्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गद्य, कहानी, नाटक, बाल साहित्य, पत्रकारिता, डायस्पोरा लेखन और अनुवाद जैसे विविध पक्षों पर विस्तृत चर्चा की गई है। यह रवींद्रनाथ टैगोर से लेकर अमिताव घोष, अरुंधति राय और समकालीन लेखकों जैसे अमीश त्रिपाठी तक के कृतित्व को समेटे हुए है।• लेखन शैली और संरचनाः पुस्तक को दो मुख्य खंडों में विभाजित किया गया है। लेखक ने हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन की पारंपरिक परिपाटी के बजाय लेखकों के प्रमुख हस्ताक्षरों और उनके कृतित्व पर अधिक बल दिया है। इसमें तुलनात्मक साहित्य के अध्ययन के लिए भी पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है।• ऐतिहासिक संदर्भः पुस्तक में 1800 ईस्वी को प्रस्थान बिंदु मानकर अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार और उसके फलस्वरूप उपजे भारतीय अंग्रेजी लेखन की समीक्षा की गई है। यह राजा राममोहन राय, तोरू दत्त और श्री अरविंद जैसे प्रारंभिक लेखकों के योगदान को भी रेखांकित करती हैयह पुस्तक शोधार्थियों, प्राध्यापकों और सचेत पाठकों के लिए एक अनिवार्य मार्गदर्शिका है, जो भारती