Librería Samer Atenea
Kálamo Books
Librería Elías (Asturias)
Librería Kolima (Madrid)
Librería Proteo (Málaga)
मूलतः यह उपन्यास सत्तर के दशक में बच्चों के लिए लिखा गया था और बच्चों की पत्रिका ’पराग’ में धारावाहिक छपा था। ताज्जुब की बात यह है कि बच्चों ने तो इसे सराहा, लेकिन उनसे अधिक उनके बुजुर्गों ने इसकी भूरी-भूरी प्रशंसा की।अब कोई कैसे कह सकता है कि यह सिर्फ बाल-उपन्यास है? हम तो कहेंगे कि चार्ली चैप्लिन की कॉमेडी की तरह बहत्तर साल का बच्चा दस साल के बच्चे से लेकर एक सौ दस साल के बच्चों को भी हंसते-हंसाते लोटपोट कर दे तो हैरत नहीं।इस उपन्यास में एक खूबी और भी हैं। यदि कोई मरीज़ इसे पढ़े तो उसके रोग में तो सुधार होगा ही होगा, उसकी सोच में भी तब्दीली आएगी। वह सेहतमंद होकर बेहतर जीवन जी सकेगा। आप सबका जीवन मंगलमय हो...