Librería Samer Atenea
Kálamo Books
Librería Elías (Asturias)
Librería Kolima (Madrid)
Librería Proteo (Málaga)
'डॉ. अंबेडकर मानसिक रूप से बहुत मजबूत, मेहनती और आत्मसम्मान से भरे हुए व्यक्ति थे। अपने जीवन की दिशा उन्होंने स्वयं तय की।'प्रोफेसर धनंजय कीर के ये शब्द बाबासाहेब के व्यक्तित्व को स्पष्ट करते हैं।बाबासाहेब का जीवन सामाजिक न्याय, समानता और आत्मसम्मान के संघर्ष को समर्पित था। उन्होंने अछूत समझे जाने वाले लोगों के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उनका विश्वास था कि शिक्षा, लोकतंत्र और संविधान के माध्यम से ही समान अधिकार प्राप्त किए जा सकते हैं।उन्होंने कहा:'हमारा भविष्य जन्म या भाग्य पर निर्भर नहीं है। हमारा भविष्य हमारी अपनी शक्ति पर निर्भर है।'बाबासाहेब ने अपने लोगों को शिक्षा, अनुशासन और संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ाया। वे सामाजिक भेदभाव और असमानता के प्रबल विरोधी थे।उनके जीवन और विचारों को समझने के लिए मैंने उर्दू, हिंदी, गुजराती और मराठी साहित्य का अध्ययन किया। मैं पिछले उन्नीस वर्षों से मौलाना आजाद उर्दू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में कार्यरत हूँ।’बाबासाहेब की डायरी’ विभिन्न हिंदी, उर्दू और मराठी स्रोतों तथा डॉ. अंबेडकर की रचनाओं के अध्ययन पर आधारित है।इस पुस्तक के प्रकाशन के लिए ’कस्तूरी विजयम्’ का हृदय से आभार। मेरी आशा है कि यह पुस्तक अधिक से अधिक पाठकों तक पहुँचे और उन्हें बाबासाहेब के जीवन, विचारों और संघर्ष से परिचित कराए।