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'अम्मा जी' एक बेटे द्वारा अपनी माँ को समर्पित भावपूर्ण स्मृति ग्रंथ है। इस पुस्तक में लेखक ने अम्मा जी के स्नेह, त्याग, सादगी और जीवन मूल्यों से जुड़ी उन यादों को शब्द दिए हैं, जो समय बीतने के बाद भी उनके मन में जीवित हैं। सूना आँगन, माँ की ओढ़नी का पल्लू, रसोई की खुशबू और प्रतीक्षा करती आँखों जैसे प्रसंग पाठक को अपने बचपन और अपनी माँ की यादों से जोड़ देते हैं।पुस्तक में अम्मा जी केवल एक माँ के रूप में नहीं, बल्कि परिवार को जोड़कर रखने वाली, शिक्षा का महत्व समझने वाली और दूसरों के दुख में साथ खड़ी होने वाली प्रेरणादायी महिला के रूप में सामने आती हैं। उनके जीवन की छोटी-छोटी घटनाएँ प्रेम, करुणा, मानवता, सेवा और रिश्तों की सच्ची अहमियत सिखाती हैं। यह पुस्तक हर उस पाठक के हृदय को छुएगी, जिसने माँ के प्रेम को महसूस किया है या जिसकी यादों में आज भी माँ की ममता जीवित है।