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यथार्थ की मिट्टी पर सदा अपने कदमों के निशाँ छोड़ने वाली अंकिता श्रीवास्तव जी ने अपने कुछ अनकहे ’अहसास’ व्यक्त किये हैं । सरल मगर प्रभावी शब्दों को पिरो कर इन्होंने अपनी हर रचना में मानो आम व्यक्ति के मन को नापा है जो अक्सर लोग ब्यान नहीं कर पाते।’अहसास’ में आप देखेंगे कभी प्यार की ख़ुशी तो कभी प्यार का दर्द तो कभी बेमतलब का प्यार या फिर खुद से ही प्यार ।शब्दों का कोई खेल नहीं होता है बस शब्दों से दिलों का मेल ही होता है । वही चंद शब्द हैं - शायद खोखले से और हरेक कवि तथा कवियत्री अपने ढंग में इसमें रंग भर देते हैं। ’अहसास’ काव्य संग्रह में अंकिता श्रीवास्तव जी ने रंग के साथ हरेक शब्द को पँख लगा दिए हैं ।’अहसास’ तभी व्यक्त होता है जब कदम की जगह कलम उठती है और अंकिता श्रीवास्तव जी की इस कलम से लिखी ९५ कविताओं में से कोई न कोई कविता आपके कोई ना कोई ’अहसास’ को अवश्य एक खूबसूरत उड़ान भरा देगी । : जितेंद्र पात्रो, प्रलेक प्रकाशन