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हिमांशु की कहानियों का एक संग्रह मैंने कुछ वर्ष पहले पढ़ा था। दो कहानियां उसमें अच्छी भी लगी थीं- ’मनुष्य चिह्न’ और ’जलते हुए डैने।’ ’जलते हुए डैने’ में यह दिखाया गया है कि अंग्रेज सरकार की व्यवस्था में विद्रोह का स्वर उठाने वाले पर भी अत्याचार ही नहीं होते थे, आजादी के बाद नई व्यवस्था में भी वैसे अत्याचार किए जाते हैं। ....उपेन्द्रनाथ ’अश्क’( यशस्वी कथाकार )