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राजू कुमार ने भौतिकवादी युग पर कई कहानियाँ लिखी हैं। इसके साथ ही ग्रामीण परिवेश में फैली तमाम प्रकार की बुराइयां, शिक्षा का गिरता स्तर, बढ़ती हुई बेरोजगारी, समाज में बढ़ता भ्रष्टाचार, भूख एवं गरीबी, पर्यावरण, प्रकृति पर इन्होंने विस्तार से लिखा है। ये एक कुशल शिक्षक के रूप में शिक्षण कार्य भी करते रहे हैं।राजू कुमार का जन्म 11 दिसम्बर, 1979 को बिहार राज्य के भोजपुर जिला के अन्तर्गत प्रखण्ड उदवन्तनगर के दरियापुर गाँव में हुआ। ये पढ़ने में शुरू से मेधावी छात्र रहे हैं। दो भाई एवं एक बहन में ये सबसे बड़े हैं। इनके पिताजी एक किसान हैं, और माता जी गृहणी। ये अपने माता-पिता, पत्नी, भाई एवं दो छोटे बच्चे, रचना एवं रोशनी के साथ दरियापुर आरा में रहते हैं। इनकी शुरुआती शिक्षा गांव के ही सरकारी प्राथमिक विद्यालय से हुई। इन्होंने आगे चलकर उच्च शिक्षा प्राप्त की। प्री-पी-एच-डी- की परीक्षा उत्तीर्ण कर इन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी की। साथ ही काशी विद्यापीठ वाराणसी से बी-एड- की पढ़ाई पूरी की। अभी राजू कुमार सरकारी उच्च विद्यालय में शिक्षक हैं।शिक्षण के बाद राजू कुमार अपना पूरा समय लेखन को देते हैं। ’अधूरा ख्वाब’ इनका पहला उपन्यास है। इसके पहले वे ’शिक्षा के अधिकार’ कानून पर किताब लिख चुके हैं।